एयर इंडिया को बेचने के बाद सरकार कई सरकारी कंपनियों को बेचने की कर रही तैयारी

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एयर इंडिया को बेचने के बाद सरकार कई सरकारी कंपनियों को बेचने की कर रही तैयारी


-सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार इकाईयों बीएसएनएल व एमटीएनएल की गैर-प्रमुख संपत्तियों की फिर से बोली लगवाने को तैयार सरकार

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- एयर इंडिया को टाटा को बेचने के बाद केंद्र सरकार एक बार फिर दो और सरकारी कंपनियों की संपत्तियों को बेंचने की तैयारी कर रही है। हालांकि बीएसएनएल व एमटीएनएल की गैर-प्रमुख संपत्तियों को सरकार एक बार पहले भी बेचने की कोशिश कर चुकी है। लेकिन पहली नीलामी में बाजार से कमजोर प्रतिक्रिया मिलने के बाद सरकार ने इसे रोक दिया था। अब सरकार नये सिरे से  एक बार फिर सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार इकाइयों भारत संचार निगम लिमिटेड और महानगर टेलीकॉम निगम लिमिटेड की गैर-प्रमुख संपत्तियों की फिर से बोली लगाएगी। जिसे देखते हुए अब सरकार टाटा जैसे खरीददार की तलाश में जुटी है।
                   एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि सरकार ने पिछले साल नवंबर में निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग के माध्यम से एमएसटीसी पोर्टल पर बीएसएनएल और एमटीएनएल की छह संपत्तियों को 970 करोड़ रुपए के आधार मूल्य पर बिक्री के लिए रखा था। बीएसएनएल की संपत्तियां हैदराबाद, चंडीगढ़, कोलकाता और भावनगर में लगभग 660 करोड़ रुपए के आरक्षित मूल्य पर थीं, जबकि मुंबई के गोरेगांव के वसारी हिल में स्थित एमटीएनएल की संपत्तियां लगभग 310 करोड़ रुपए के आरक्षित मूल्य पर लिस्टेड थी। एमटीएनएल और बीएसएनएल गैर-प्रमुख संपत्तियों का मुद्रीकरण 2019 के अंत में केंद्र द्वारा घोषित 68,000 करोड़ रुपए की योजना (दोनों कंपनियों को बचाने) का हिस्सा है। सरकार ने सीबीआरई साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड, जेएलएल प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स (इंडिया), कुशमैन एंड वेकफील्ड और नाइट फ्रैंक को बिक्री प्रक्रिया के लिए सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है।
               एमटीएनएल दिल्ली और मुंबई में सेवाएं प्रदान करती है तो बीएसएनएल इन दोनों शहरों को छोड़कर बाकी पूरे देश में सेवाएं देती है। पहली नीलामी निराशाजनक रही है लेकिन सरकार को लगता है पोर्टल का उपयोग अन्य कंपनियों की गैर-प्रमुख संपत्ति बेचने के लिए भी किया जा सकता है। सरकार सार्वजनिक उपक्रमों की गैर-प्रमुख संपत्तियों को बेचने के लिए एमएसटीसी प्लेटफॉर्म का उपयोग करेगी, जिसका समन्वय दीपम द्वारा किया जाएगा। इसके जरिए बीईएमएल और शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया जैसे अन्य सार्वजनिक उपक्रमों की परिसंपत्तियों को बेचा जा सकता है। रणनीतिक विनिवेश के लिए उनकी गैर-प्रमुख संपत्तियों को चिन्हित किया जा चुका है। 6 लाख करोड़ रुपए की राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के तहत केंद्र सरकार ने संबंधित कई परियोजनाओं की भी पहचान की है।
                 यहां तक की अगर सरकारी कंपनियों का विनिवेश नहीं भी किया जा रहा तो भी सरकार गैर-प्रमुख संपत्तियों को अलग करने या पूंजीगत व्यय के लिए राजस्व उत्पन्न करने, कर्ज कम करने और दक्षता में सुधार करने के लिए उन्हें बेचने और बेचने के लिए जोरदार जोर दे रही है। डीआईपीएएम ने इस बात की वकालत की है कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को संबंधित मंत्रालयों के साथ अपने समझौता ज्ञापन में परिसंपत्ति मुद्रीकरण और बाजार पूंजीकरण में सुधार शामिल करना चाहिए। अधिकांश राज्य-संचालित संस्थाओं के पास बड़े कॉर्पोरेट कार्यालय, आवास और भूमि बैंक हैं जिनकी मुख्य संचालन के लिए आवश्यकता नहीं हो सकती है। उदाहरण के लिए, भारतीय रेलवे के पास अपने स्टेशनों के आसपास काफी जमीन है।

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