2024 की भीषण गर्मी ने यूरोप में ली 62,700 से ज़्यादा जानें, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज़्यादा प्रभावित

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October 8, 2026

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2024 की भीषण गर्मी ने यूरोप में ली 62,700 से ज़्यादा जानें, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज़्यादा प्रभावित

मानसी शर्मा /- यूरोप में 2024 की गर्मी ने हालात बेहद गंभीर कर दिए। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, इस भीषण गर्मी के चलते 62,700 से अधिक लोगों की मौत हुई। यह रिपोर्ट ‘नेचर मेडिसिन’ जर्नल में सोमवार को प्रकाशित हुई। अध्ययन में बताया गया कि गर्मी का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ा।

तीन साल में 1.8 लाख से ज़्यादा मौतें

यह अध्ययन बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया, जिसमें 32 यूरोपीय देशों से गर्मियों के दौरान हुई दैनिक मौतों का डेटा इकट्ठा किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से 2024 के बीच गर्मी की वजह से कुल 1,81,000 से ज़्यादा मौतें हुईं। अकेले 1 जून से 30 सितंबर 2024 के बीच मौतों की दर में 23% की बढ़ोतरी देखी गई, हालांकि इस अवधि में कुल मौतों की संख्या 2022 के मुकाबले थोड़ी कम रही।

2024 – अब तक की सबसे गर्म यूरोपीय गर्मी

यूरोपीय संघ की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के अनुसार, 2024 की गर्मी अब तक की सबसे गर्म रही। सबसे अधिक मौतें दक्षिणी यूरोप में दर्ज की गईं, जहां तापमान लगातार ऊंचा बना रहा। इटली में हालात सबसे गंभीर रहे क्योंकि वहां बुजुर्गों की आबादी सबसे अधिक है।

स्टडी के प्रमुख लेखक टोमास जानोस ने कहा, “ये आंकड़े चेतावनी हैं कि हमें अपनी आबादी को गर्मी से बचाने के लिए गंभीर तैयारी शुरू करनी होगी।”

2025 में भी गर्मी ने बढ़ाई चिंता

हालांकि इस अध्ययन में 2025 को शामिल नहीं किया गया है, लेकिन इटली की इमरजेंसी मेडिसिन सोसाइटी (SIMEU) ने बताया कि इस साल भीषण गर्मी के कारण अस्पतालों में 20% अधिक मरीज पहुंचे। सिम्यू के अध्यक्ष एलेसांद्रो रिकार्डी ने कहा कि, “जिन मरीजों की सेहत पहले से ही कमजोर थी और जो कई बीमारियों से जूझ रहे थे, उन पर गर्मी का असर सबसे ज़्यादा पड़ा। इससे अस्पतालों पर वैसा ही दबाव पड़ा जैसा आमतौर पर फ्लू सीजन में देखने को मिलता है।”

निष्कर्ष: जलवायु संकट की गंभीर चेतावनी

तीन साल लगातार गर्मियों में बढ़ता तापमान और उससे होने वाली मौतें यह दर्शाती हैं कि जलवायु परिवर्तन अब जीवन के लिए सीधा खतरा बन चुका है। रिपोर्ट विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि यदि तैयारी नहीं की गई तो आने वाले वर्षों में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।

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