होली 2026: सुख, शांति और समृद्धि के लिए इन सात स्थानों पर करें दीप प्रज्वलन

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August 2, 2026

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-होली की रात्रि का आध्यात्मिक महत्व

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होली का पर्व केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होली की रात वर्ष की प्रमुख चार विशेष रात्रियों में गिनी जाती है। इसी कारण इस अवसर पर जप, तप, साधना और दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस रात विधि-विधान से दीपक जलाने पर नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का संचार होता है।

मुख्य द्वार पर दीप प्रज्वलन से सकारात्मक ऊर्जा
घर का प्रवेश द्वार ऊर्जा का प्रमुख स्रोत माना जाता है। होली की रात मुख्य द्वार के दोनों ओर घी का दीपक जलाना शुभ माना गया है। कहा जाता है कि ऐसा करने से दरिद्रता और बाधाएँ दूर होती हैं तथा घर में लक्ष्मी कृपा बनी रहती है।

तुलसी के समीप दीपक जलाने की परंपरा
आँगन या बालकनी में स्थापित तुलसी के पौधे को पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। होली की रात तुलसी के पास दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य में सुधार और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही पारिवारिक विवादों में भी कमी आती है।

रसोईघर में दीपक से अन्न-धन की वृद्धि
रसोईघर को अन्नपूर्णा का स्थान माना जाता है। इस दिन रसोई के स्वच्छ स्थान पर सरसों के तेल का दीपक जलाने से घर में अन्न और धन की कमी नहीं रहती। धार्मिक मान्यता है कि इससे आर्थिक स्थिरता बनी रहती है और घर का भंडार भरा रहता है।

पूजा कक्ष में अखंड दीप का महत्व
होली की रात्रि में पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाकर ईश्वर का ध्यान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। यदि संभव हो तो कुछ समय के लिए अखंड दीप प्रज्वलित करना शुभ होता है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और घर में आध्यात्मिक वातावरण बनता है।

पवित्र वृक्ष के नीचे दीपदान
यदि आसपास पीपल या अन्य पवित्र वृक्ष हो तो उसके नीचे दीपक जलाकर परिक्रमा करना शुभ फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इससे ग्रह दोष और पितृ बाधाएँ शांत होती हैं तथा जीवन की अड़चनें धीरे-धीरे दूर होती हैं।

होलिका दहन स्थल पर दीप अर्पण
होलिका दहन के पश्चात अग्नि के समीप दीपक जलाकर परिवार की उन्नति और सुख-शांति की कामना की जाती है। यह परंपरा बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक मानी जाती है। ऐसा करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

दक्षिण-पश्चिम दिशा में दीपक से स्थिरता
वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिशा स्थायित्व और सुरक्षा की दिशा मानी जाती है। इस कोने में दीपक जलाने से परिवार में विश्वास, स्थिरता और आर्थिक मजबूती बढ़ती है।

होली की पावन रात्रि पर श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए ये छोटे-छोटे उपाय जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाले माने जाते हैं।

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