हर्षवर्धन सतपाल को मिली महाराष्ट्र कांग्रेस की कमान, गठबंधन साथियों के बीच मची अफरातफरी !

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हर्षवर्धन सतपाल को मिली महाराष्ट्र कांग्रेस की कमान, गठबंधन साथियों के बीच मची अफरातफरी !

मानसी शर्मा/- महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। तब से सूबे में प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई थी। शुक्रवार को कांग्रेस के आला कमान ने हर्षवर्धन सतपाल को महाराष्ट्र कांग्रेस का प्रमुख बना दिया है। हर्षवर्धन सतपाल को महाराष्ट्र का अध्यक्ष नियुक्त करके कांग्रेस ने बड़ा दांव खेला है। हर्षवर्धन सतपाल पुराने और अनुभवी कांग्रेस कार्यकर्ता रहे हैं। उन्होंने लंबे समय तक संगठन में काम किया है। कांग्रेस का आला कमान ने एक फैसले से कई निशाना साधने की कोशिश की है।

हालांकि, हर्षवर्धन सतपाल के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस के गठबंधन साथियों में ही ऊहापोह की स्थिति होगी। कौन हैं हर्षवर्धन सतपाल? महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के रहने वाले हर्षवर्धन सतपाल करीब 25 सालों से राजनीति में हैं। साल 1999 में वो पहली बार सबसे युवा जिला परिषद अध्यक्ष बने। साल 2024 में सतपाल पहली बार बुलढाणा विधानसभा सीट से चुनाव जीते। उन्होंने लंबे समय तक कांग्रेस संगठन में भी काम किया। सतपाल पंचायती राज प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय सचिव भी हैं। वो गुजरात, पंजाब और मध्य प्रदेश के सह-प्रभारी भी रह चुके हैं। सबसे अहम बात सतपाल मराठी समुदाय से आते हैं और यही कारण है कि हर कोई उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले को कांग्रेस की मास्टरस्ट्रोक बता रही है।

मराठा वोटरों पर नजर? हर्षवर्धन सतपाल को महाराष्ट्र की कमान सौंपना कांग्रेस के लिए बड़ा फायदा साबित हो सकता है। सतपाल मराठा समुदाय से आते हैं और महाराष्ट्र में मराठा समुदाय की आबादी करीब 28 फिसदी है, जो की 52%वाले OBC समुदाय के बाद दूसरी बड़ी आबादी है। अगर सीटों के हिसाब से देखें तो 288 में से 116 सीटों पर मराठा वोटरों का वर्चस्व है। कांग्रेस को लोकसभा में फायदा हो या विधानसभा चुनाव में नुकसान, सबके पीछे मराठा वोटरों की अहम भूमिका है। कांग्रेस सतपाल को प्रदेश की कमान देकर मराठा वोटरों को अपनी ओर आकर्षितकरना चाहती है। इसके साथ ही मराठा चेहरे को कमान देने के बाद कांग्रेस का गठबंधन की मजबूरी भी समाप्त होगी। दरअसल, कांग्रेस महाराष्ट्र में मराठा वोटों के लिए शरद पवार के सहारे रहती है। कई मौकों पर उस कारण शरद पवार की कई बातों को ना चाहते हुए भी कांग्रेस को माननी पड़ती है। सतपाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद गठबंधन के द्वारा दवाब की राजनीतिक का अंत हो जाएगा। कार्यकर्ता को खुश करना मकसद गौरतलब है कि महाराष्ट्र में शिवसेना और NCP मराठा वोटों के सबसे बड़े हिस्सेदार माने जाते हैं।

कांग्रेस को मूलत: OBC तबके का वोट मिलता रहा है। लेकिन 2014 में नरेंद्र मोदी का राष्ट्रीय राजनीति में पदार्पण के बाद समीकरण में काफी बदलाव देखने को मिला है। OBC का एक बड़ा अंश भाजपा की ओर गया है। यही कारण है कि महाराष्ट्र में कांग्रेस ने सिर्फOBC वोटरों के सहारे ना रहने का फैसला किया है।

उन्होंने सतपाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर मराठा वोट पर अपनी दावेदारी ठोक दी है। इसके साथ ही हर्षवर्धन को प्रदेश की कमान देकर कार्यकर्ताओं के बीच भी सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है। गौरतलब है कि नाना पटोले ने भले ही अपनी राजनीति की शुरुवात कांग्रेस से की लेकिन वो बीच में निर्दलीय और फिर भाजपा में चले गए। साल 2018 में वो वापस कांग्रेस में लौट आए। जिसके बाद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। हालांकि, हर्षवर्धन को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर जमीन पर काम करने वालों को सीधा संदेश देने की कोशिश की है।

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