सूत्र नेति से प्रदूषणजनित सिरदर्द व साइनस में राहत: डॉ. रमेश कुमार

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-द्वारका में योगाभ्यास एवं षट्कर्म शिविर का आयोजन

नई दिल्ली/द्वारका/उमा सक्सेना/-   द्वारका स्थित अध्यात्म योग संस्थान द्वारा शनिवार को सेक्टर-18 पार्क में एक दिवसीय योगाभ्यास एवं षट्कर्म शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में योग साधकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य योग विशेषज्ञ विश्व योग चैंपियन डॉ. रमेश कुमार, योगाचार्य एवं प्रोफेसर, योग विज्ञान विभाग, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली रहे।

जल नेति और सूत्र नेति का व्यावहारिक प्रशिक्षण
शिविर के दौरान डॉ. रमेश कुमार ने प्रतिभागियों को जल नेति और सूत्र नेति का व्यावहारिक अभ्यास कराया। उन्होंने बताया कि बढ़ते प्रदूषण के कारण सिरदर्द, साइनस, साइनोसाइटिस और नाक से जुड़ी समस्याएं आम होती जा रही हैं, जिनके लिए जल नेति और सूत्र नेति अत्यंत प्रभावी और रामबाण उपाय हैं। नियमित रूप से इन क्रियाओं का अभ्यास करने से सामान्य सिरदर्द, माइग्रेन, साइनस की समस्या, नाक की हड्डी या मांस बढ़ने जैसी परेशानियों में राहत मिलती है।

क्या है जल नेति की प्रक्रिया
डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि जल नेति एक सरल क्रिया है, जिसे सामान्य व्यक्ति भी कर सकता है। इसके लिए गुनगुने पानी में स्वादानुसार नमक मिलाकर नेति लोटे का उपयोग किया जाता है। कागासन में बैठकर जिस नासिका से श्वास अधिक चल रही हो, उसमें लोटे की नाल लगाकर धीरे-धीरे सिर झुकाया जाता है। इससे पानी एक नासिका से प्रवेश कर दूसरी नासिका से बाहर निकलता है। इससे नाक में जमा श्लेष्मा नरम होकर साफ होने लगता है।

सूत्र नेति से निकलता है जमा हुआ म्यूकस
जल नेति के बाद सूत्र नेति की जाती है। इसमें मोम लगी सूत की रस्सी को धीरे-धीरे नासिका से डालकर मुख के रास्ते बाहर निकाला जाता है और हल्का घर्षण किया जाता है। यह क्रिया दोनों नासिकाओं से की जाती है। इसके माध्यम से जमा हुआ म्यूकस बाहर निकलता है और साइनस, नाक में बढ़ा मांस या हड्डी जैसी समस्याओं में धीरे-धीरे सुधार होता है।

स्वास्थ्य लाभ और सावधानियां
डॉ. रमेश कुमार के अनुसार जल नेति और सूत्र नेति से साइनस, साइनोसाइटिस, खर्राटे, अनिद्रा, लगातार सिरदर्द, बालों का झड़ना या समय से पहले सफेद होना, माइग्रेन और मानसिक तनाव जैसी अनेक समस्याओं में लाभ मिलता है। हालांकि, हाल ही में किसी प्रकार का ऑपरेशन हुआ हो तो यह अभ्यास डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। क्रिया से पहले और बाद में नाक में गाय का घी या बादाम का तेल दो-दो बूंद डालने तथा बाद में भस्त्रिका प्राणायाम करने की सलाह दी गई। यह अभ्यास हमेशा योग विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही किया जाना चाहिए।

गणमान्य लोगों की उपस्थिति
कार्यक्रम में प्रो. आर.के. सिंह, डॉ. दिनेश कुमार, गजराज सिंह, कलावती आर्या, शिखा गुप्ता, लोकेश यादव, जीवन प्रकाश शास्त्री सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अंत में संस्था के महासचिव अनिल बाल्याण ने सभी योग साधकों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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