
बिहार/अनीशा चौहान/- वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर सदन से सड़क तक विरोध-प्रदर्शन जारी है। इसी बीच, बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हो रही है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अपनी दलीलें पेश कीं।
कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा पूरा ब्योरा
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि यह केवल ड्राफ्ट रोल है और इतने बड़े स्तर के अभ्यास में कुछ छोटी-मोटी गलतियां हो सकती हैं। इस पर बेंच ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह पूरी तैयारी के साथ आए और प्रक्रिया शुरू होने से पहले की मतदाताओं की संख्या, मृतकों की संख्या, वर्तमान मतदाता संख्या और अन्य प्रासंगिक आंकड़ों के साथ उपस्थित हो, क्योंकि इन पर सवाल उठाए जाएंगे।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट का रुख
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और चुनाव आयोग को प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति दी थी। साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि बड़ी संख्या में नाम हटाए गए, तो वह इसमें दखल देगा। इस समय ड्राफ्ट सूची से 65 लाख नाम हटाए जाने को लेकर विवाद है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि 65 लाख मतदाता बिना कारण प्रभावित हो रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी है।





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