सुधा ने हजारों जिंदगियां संवारी,अब सरकारी मदद की दरकार

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September 23, 2026

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सुधा ने हजारों जिंदगियां संवारी,अब सरकारी मदद की दरकार

-निस्वार्थ सेवा की मिसाल बनी सुधा,हजारों महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर

बिलासपुर/छत्तीसगढ़/-  सामाजिक सेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम बन चुकीं सुधा शर्मा आज अपने अथक प्रयासों से कई महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। समाजसेवी होने के साथ-साथ वे एक कुशल वोकेशनल ट्रेनर भी हैं, जो महिलाओं और युवतियों को सिलाई, मेहंदी, केक मेकिंग, टोकरी और झाड़ू बनाना जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना रही हैं।

सुधा प्रवाह महिला सशक्तिकरण फाउंडेशन की संस्थापिका सुधा शर्मा बताती हैं, “मैंने देखा कि बहुत सी महिलाएं हुनर तो रखती हैं लेकिन उचित मार्गदर्शन और मंच के अभाव में वे घर की चारदीवारी तक सीमित रह जाती हैं। यही सोचकर मैंने निःशुल्क प्रशिक्षण शिविरों की शुरुआत की।” उनके इन प्रयासों से दर्जनों महिलाएं अब स्वयं का रोजगार शुरू कर चुकी हैं और अपने परिवार को आर्थिक सहयोग दे रही हैं। सुधा की ट्रेनिंग विशेष रूप से ग्रामीण व शहरी गरीब वर्ग की महिलाओं के लिए होती है, जिसमें न केवल उन्हें व्यावसायिक कला सिखाई जाती है, बल्कि आत्मविश्वास और स्वाभिमान भी बढ़ाया जाता है। वे बताती हैं, “हम सिर्फ हुनर नहीं सिखाते, हम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की ताकत देते हैं।”

सुधा शर्मा की सबसे खास बात यह है कि वे व्यक्तिगत रूप से हर प्रशिक्षणार्थी की प्रगति पर ध्यान देती हैं। उनका सपना है कि हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो और किसी पर निर्भर न रहे। वे कहती हैं, “अगर एक महिला सशक्त होती है, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत बनता है।” उनके कार्यों की सराहना कई सामाजिक संस्थाएं कर चुकी हैं और अब वे अन्य जिलों में भी अपने प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बना रही हैं। सचमुच, सुधा शर्मा जैसी महिलाएं समाज में बदलाव की मिसाल हैं।

सरकारी मदद की मोहताज़
सुधा शर्मा को इस बात का अफसोस है कि लगातार तीन वर्षोंं से समाजसेवा के क्षेत्र में  सक्रियता निभाने के बावजूद सरकार की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। अपने बूते पर सुधा बारह सौ महिलाओं को प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बना चुकी हैं और ये महिलाएं अब अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं।

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