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शाम ए रंगमंच में किया गया अनादरिता का सफल मंचन

-पात्रों ने कई एकल भूमिकाओं के माध्यम से नाटक का मूल स्वरूप दर्शकों के सामने रखा
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- दरवाज़े पर एक खट खट और सभी की निगाहें उसी और, ये दृश्य है 9 अपै्रल शनिवार शाम एक नाटक मंचन का जिसको खेला गया संसप्तक के स्टूडीओ आगोन में, ये शाम-ए- रंगमंच को नाम दिया गया “अनादरिता” नाटक के चार पहलू और एक कविता, नाटककार तोरित मित्रा, निर्देशक रुमा बोस के साथ-साथ 5 निरपेक्ष महिलाएँ, और सब के भीतर का एक डर, अपनी ही मृत शरीर से एक अनोखी बातचीत, कार्यक्रम में पुरज़ोर हिस्सा लेना पहुँची,
                कार्यक्रम में आमंत्रित मुख्या अतिथि आराधना प्रधान, जोकी मानी जानी फ़ेस्टिवल निर्देशक और संग्रहाध्यक्ष है और साथ ही साथ मासी.इंक की संस्थापक निदेशक भी रह चुकी है। नाटक को सवकुशल बनाने के लिए सबसे बड़ा योगदान रहा नाटक में हिस्सा लेने वाली अभिनेत्रियों में लावण्या मृत का पात्र अपर्णा बनर्जी ने, दीपशिकारा मूर्तदेह को किया कौशिकी देव ने, सावित्री मूर्तदेह में परमा भट्टाचार्य और अनुप्रिया मूर्तदेह के पात्र में दिखायी दी रूबी दासगुप्ता ने के रूप में अपने पात्र निभाये। नाटक का संचालन कर रही रुमा बोस ने कहा कि ‘कोरोना महामारी ने हर इंसान के जीवन में एक अनिश्चितता का प्रकोप डाल दिया है जिसकी वजह से उम्मीद की कई किरणे अभी अंधकार में खोयी हुई है, और अब ज़रूरत है की हम अपने अंधकार में उन उम्मीदों को खोजें और उससे एक नयी और उज्जवल किरण प्रज्वलित करें।
               ’जहां तक बात करें इन नाटकों की तो ये सारें एकल नाटक प्रस्तुति रही, नाटक से पहले कई वर्कशाप का भी प्रबंध किया गया ताकि सभी कलाकार बदलते नाटकों के स्वरूप को और साथ ही साथ समय का सही आँकलन कर सके और उसे अपने यथार्थ जीवन से जोड़ सके। संसप्तक नाट्य दल ने 2016 में एक मूव्मेंट की शुरुआत की थी, जिसको आज सब थियटर आफ डार्क से जानते हैं, इस मूव्मेंट का छठा अध्याय अपॉथीओसिस यानी प्रतिरूप के अंतर्गत इस पूरे कार्यक्रम को संचित किया गया और आंतरिक स्वाधीनता जो इस अध्याय की महत्वपूर्ण कड़ी है उसे इस नाट्य मंचन के हवाले से सामने रखा गया।
                तोरित मित्रा द्वारा लिखित एक कविता “ओजोज्ञा पृथ्वी अमादेर बाशभूमि” से श्रीमोयी दासगुप्ता ने शुभारंभ किया, फिर कार्यक्रम की श्रेणी में कई एकल नाटक आते गए, जिसका रूप रेखा खिचा अंजोन बोस ने, संसप्तक की शुरुआत 1992 हुई, इसको शुरू किया तोरित मित्रा ने इनके साथ इनके कुछ ख़याल मिज़ाज नाट्यकर्मी भी जुड़े। संसप्तक ने 100 से भी ज़्यादा नाट्य मंचन किया, इसके अलावा वर्कशाप, सेमिनार, कला और थियटर प्रदर्शनी भी आयोजित की, अनादरिता उसी में एक आयोजन है, कार्यक्रम का समापन 10 अप्रैल को सीआर पार्क एच ब्लॉक स्थित स्टूडिओ अगोन में हुआ।

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