विश्व ध्यान दिवस पर आरजेएस ने प्रवासी माह में काकोरी के शहीदों को श्रद्धांजलि दी

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September 7, 2026

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विश्व ध्यान दिवस पर आरजेएस ने प्रवासी माह में काकोरी के शहीदों को श्रद्धांजलि दी

नई दिल्ली/- श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक “ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना। अन्ये सांख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे” से प्रेरित होकर राम-जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) और आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक उदय कुमार मन्ना ने 19 दिसंबर 2024 को विश्व ध्यान दिवस (21 दिसंबर) और काकोरी शहादत दिवस (19 दिसंबर) के अवसर पर एक ऑनलाइन परिचर्चा आयोजित की।

इस कार्यक्रम में सह-आयोजक डॉ. पुष्कर बाला, प्राचार्या बीडीएसएल महिला कॉलेज, जमशेदपुर के माता-पिता स्व. देव वंश सहाय और माता स्व. चिंगारी देवी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही, इस अवसर पर आरजेएस के प्रवासी माह में मुख्य अतिथि बीके राजश्री ने ध्यान और योग के महत्व पर बात की। उन्होंने बताया कि ध्यान और योग नकारात्मक विचारों को दूर करने, मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण को बढ़ावा देने में अत्यंत सहायक हैं।

नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करने में ध्यान और योग का महत्व

बीके राजश्री ने कहा, “ध्यान और योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए, बल्कि मानसिक और आत्मिक शांति के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। जब हम अपने भीतर के नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करते हैं, तो हम अपने जीवन में सकारात्मकता ला सकते हैं। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र ने 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस के रूप में घोषित किया है, जिससे दुनिया भर में सकारात्मकता का प्रचार हो सके।”

शहीदों के योगदान पर वक्तव्य

मुख्य वक्ता, शहीद वंशज अशफ़ाक उल्ला खान ने काकोरी कांड के वीरों की शहादत पर चर्चा की और कहा, “रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक उल्ला खान, ठाकुर रोशन सिंह ने 19 दिसंबर को अपने प्राणों की आहुति दी, ताकि भारत को स्वतंत्रता मिल सके। उनका बलिदान राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता के प्रतीक थे। इन वीरों की शहादत ने हमें एकजुट होकर देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में भाग लेने की प्रेरणा दी।”

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्कूलों और कॉलेजों में स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को कैलेंडर के माध्यम से नई पीढ़ी को बताया जा सकता है, जिससे वे इन महान सेनानियों से प्रेरित हो सकें।

काकोरी कांड का महत्व

हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमित आजाद ने काकोरी कांड के बारे में कहा, “अंग्रेजी हुकूमत काकोरी कांड को कृत्य के रूप में पुकारती थी, लेकिन यह कृत्य भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सुनहरा अध्याय बन गया। यह वह समय था जब भारत मां अंग्रेजी हुकूमत की बेड़ियों में जकड़ी हुई थी, और हमारे शहीदों ने अपना जीवन आहुति देकर भारतीय स्वतंत्रता के लिए मार्ग प्रशस्त किया।”

सकारात्मक आंदोलन का महत्व

इस परिचर्चा में नकारात्मक विचारों को नियंत्रित करने, सकारात्मकता को बढ़ावा देने और नकारात्मकता पर काबू पाने में सकारात्मक आंदोलन के महत्व पर जोर दिया गया। इस कार्यक्रम में सुरजीत सिंह दीदेवार, मयंक, राजेन्द्र सिंह कुशवाहा, सत्येंद्र त्यागी, इशहाक खान, ओमप्रकाश झुनझुनवाला, ब्रजकिशोर और आकांक्षा समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

आगामी कार्यक्रम और योजनाएं

इस बीच, आरजेएस ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। 22 दिसंबर को सुबह 11 बजे 297वां आरजेएस पीबीएच कार्यक्रम दीदेवार जीवन ज्योति के सहयोग से आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही, 29 दिसंबर को दिसंबर महीने का न्यूज़लेटर लोकार्पण किया जाएगा। इसके अलावा, राष्ट्रीय किसान दिवस (23 दिसंबर), सुशासन दिवस (25 दिसंबर) और साल की विदाई व संकल्प दिवस (31 दिसंबर) भी मनाए जाएंगे।

इस कार्यक्रम ने ध्यान और योग के महत्व को समझने के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानियों की शहादत को याद करते हुए राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा दी।

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