वसंत पंचमी आज: सरस्वती आराधना का पावन पर्व, शुभ मुहूर्त में करें पूजा और अर्पित करें देवी को प्रिय भोग

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-ज्ञान, संगीत और कला की देवी की उपासना का विशेष दिन

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    माघ मास की शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला वसंत पंचमी का पर्व आज पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन मां सरस्वती को समर्पित होता है, जिन्हें विद्या, वाणी, बुद्धि और कला की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर व्यक्ति को ज्ञान, विवेक और रचनात्मकता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। स्कूलों, कॉलेजों, मंदिरों और घरों में विशेष पूजा-पाठ का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण कर देवी की आराधना कर रहे हैं, क्योंकि पीला रंग वसंत, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

शुभ मुहूर्त में पूजा का विशेष महत्व
ज्योतिषीय गणना के अनुसार सरस्वती पूजा के लिए प्रातःकाल से दोपहर तक का समय अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में की गई साधना और मंत्र जाप से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसलिए भक्तजन इस समय के भीतर ही पूजा संपन्न करने का प्रयास कर रहे हैं। इस दिन बच्चों का विद्यारंभ संस्कार भी कराया जाता है, जिससे उनकी पढ़ाई की शुरुआत मंगलमय मानी जाती है।

ऐसे करें सरस्वती पूजा की विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ या पीले वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर चौकी बिछाकर उस पर पीला कपड़ा रखें और मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। प्रतिमा के पास कलश रखें और दीप-धूप जलाएं। इसके बाद रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करें। किताबें, कॉपी, पेन, वाद्य यंत्र और पढ़ाई से जुड़ी सामग्री देवी के चरणों में रखकर आशीर्वाद लें। फिर मंत्रों का जाप करें— “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः”। अंत में आरती कर प्रसाद वितरण करें। पूजा के बाद इन्हीं वस्तुओं से पढ़ाई या अभ्यास शुरू करना शुभ माना जाता है।

मां सरस्वती को अर्पित करें ये विशेष भोग
वसंत पंचमी पर देवी को सात्विक और पीले रंग के खाद्य पदार्थ अर्पित करने की परंपरा है। केसर वाली खीर, मीठे पीले चावल, बूंदी, बेसन के लड्डू, गुड़-चावल, खिचड़ी, पंचामृत, बेर और मौसमी फल प्रमुख रूप से चढ़ाए जाते हैं। माना जाता है कि इन प्रसादों से माता प्रसन्न होकर ज्ञान और सफलता का आशीर्वाद देती हैं।

दान-पुण्य और सेवा का भी महत्व
इस दिन जरूरतमंदों को पीले वस्त्र, अनाज, दाल, किताबें, कॉपी और पेन दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। विद्यार्थियों की सहायता करना या ब्राह्मणों को भोजन कराना भी शुभ फल देता है। धार्मिक मान्यता है कि शिक्षा से जुड़ी वस्तुओं का दान करने से मां सरस्वती की कृपा जीवनभर बनी रहती है।

क्या करें और क्या न करें
वसंत पंचमी के दिन सात्त्विक आहार लें, काले कपड़े पहनने से बचें और पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं। बिना स्नान के पूजा न करें। पूरे दिन सकारात्मक विचार रखें और संयमित वाणी का प्रयोग करें, क्योंकि मां सरस्वती वाणी की भी देवी हैं।

पर्व का आध्यात्मिक संदेश
पौराणिक कथा के अनुसार सृष्टि की रचना के समय जब चारों ओर मौन था, तब ब्रह्मा जी के आह्वान पर मां सरस्वती प्रकट हुईं और वीणा की ध्वनि से संसार में वाणी और चेतना का संचार हुआ। यही कारण है कि इस दिन को ज्ञान और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। वसंत पंचमी प्रकृति में बदलाव, नई फसल और जीवन में नई ऊर्जा का भी संकेत देती है।

वसंत पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और सकारात्मकता का उत्सव है। इस दिन की गई पूजा और साधना से शिक्षा, करियर और जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं।

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