मानसी शर्मा/- रूस पिछले कुछ समय से भारत को अफगान क्वाड में शामिल करने की इच्छा जाहिर कर रहा है। इस क्वाड में वर्तमान में रूस, चीन, पाकिस्तान और ईरान शामिल हैं। रूस चाहता है कि भारत भी इस समूह का हिस्सा बने। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की मौजूदगी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है। बता दें कि,अफगान क्वाड का उद्देश्य अफगानिस्तान में स्थिरता और क्षेत्रीय हितों को सुनिश्चित करना है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हाल ही में कहा था कि भारत का इस क्वाड में शामिल होना अफगानिस्तान में उसकी भूमिका को बढ़ाने के लिए एक सकारात्मक कदम होगा।
हालांकि, भारत ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारत के लिए मुख्य चुनौती ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ से बात करते हुए एक विशेषज्ञ ने कहा कि पाकिस्तान के साथ रिश्ते भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती हो सकते हैं। अगर रूस चाहता है कि भारत अफगान क्वाड का हिस्सा बने, तो पहले पाकिस्तान को अपने दृष्टिकोण में सुधार लाना होगा। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते बिगड़ते हैं,
तो भारत के लिए रूस के इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देने की संभावना बढ़ सकती है। एक अन्य विशेषज्ञ का कहना है कि अगर भारत अफगान क्वाड में शामिल होता है, तो इससे अफगानिस्तान में मानवीय सहयोग बढ़ेगा और भारत की क्षेत्रीय ताकत के रूप में साख भी मजबूत होगी। क्या चाहता है रूस? रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का मानना है कि भारत का अफगान क्वाड में शामिल होना न केवल अफगानिस्तान में समस्याओं के समाधान में मदद करेगा,
बल्कि इससे भारत को एक नया मंच मिलेगा, जहां वह पाकिस्तान और चीन के साथ बातचीत कर सकता है। उनका मानना है कि इस क्वाड में भारत का हिस्सा बनना एक सही कदम होगा, जिससे दोनों देशों के बीच बेहतर संवाद की संभावना बढ़ेगी। भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर विशेषज्ञों की राय भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से तनाव चला आ रहा है। 2019के पुलवामा हमले के बाद दोनों देशों के रिश्तों में और खटास आई है। इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक की थी, जिससे दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्ते पूरी तरह से खत्म हो गए। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की वजह से भारत इस क्वाड में शामिल होने से बच सकता है। हालांकि, यह सिर्फ विशेषज्ञों की राय है और भारत ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। रूस के विदेश मंत्री के बयान के बावजूद भारत ने इस पर ना तो पुष्टि की है और ना ही इसे नकारा किया है।


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