अनीशा चौहान/- सिंधु जल समझौते को लेकर चल रहे भारत-पाकिस्तान के बीच विवादों के बीच विश्व बैंक के प्रमुख अजय बंगा का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस समझौते में विश्व बैंक की भूमिका किसी समाधानकर्ता या निर्णायक की नहीं, बल्कि केवल एक मध्यस्थ (Facilitator) की है।
अजय बंगा ने कहा, “मीडिया में इस मुद्दे को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं कि विश्व बैंक इस जल विवाद को कैसे हल करेगा, लेकिन यह सब निराधार है। हमारी भूमिका केवल एक मध्यस्थ के रूप में है।”
उन्होंने आगे कहा कि विश्व बैंक दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने में सहयोग करता है, लेकिन किसी एक पक्ष के हित में निर्णय लेने की संस्था नहीं है। बंगा के अनुसार, यह एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसे भारत और पाकिस्तान ने 1960 में हस्ताक्षर किया था और इसमें विश्व बैंक की भूमिका एक तटस्थ संस्था के रूप में परिभाषित की गई है।
विश्व बैंक प्रमुख के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि जल विवाद का समाधान केवल भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के ज़रिए ही संभव है।


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