पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को लिखा पत्र

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
August 9, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-आबकारी नीति मामले में राजनीतिक हलचल तेज

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति से जुड़े मामले में एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक ने दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब इससे पहले आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया भी इसी मामले में न्यायमूर्ति शर्मा को पत्र लिख चुके हैं और अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश न होने की बात कह चुके हैं।

दुर्गेश पाठक ने अपने पत्र में कहा है कि वह इस पूरे मामले में अरविंद केजरीवाल के साथ खड़े हैं और परिस्थितियों के चलते वे अदालत में उपस्थित होने में असमर्थ हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी ओर से इस केस में कोई वकील भी पेश नहीं किया जाएगा। उनके इस रुख को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है।

इससे पहले मनीष सिसोदिया ने भी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र भेजकर बताया था कि वह इस मामले में आगे अदालत में पेश नहीं होंगे और उन्होंने इसे लेकर अपना निर्णय स्पष्ट कर दिया था। वहीं, अरविंद केजरीवाल ने भी इसी न्यायाधीश की अदालत में स्वयं या अपने किसी वकील के माध्यम से पेश न होने की घोषणा की थी।

केजरीवाल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया था कि वह अपनी अंतरात्मा की आवाज पर यह निर्णय ले रहे हैं और इसके परिणामों के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा था कि भले ही इससे उनके कानूनी हित प्रभावित हों, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रहेंगे। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट जाने के अपने अधिकार को सुरक्षित रखने की बात भी कही थी।

सिसोदिया ने भी अपने पत्र में यह दावा किया था कि उन्हें इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं बची है और उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह के मार्ग पर चलने की बात कही थी। उन्होंने यह भी लिखा था कि वह अदालत में आगे कोई वकील प्रस्तुत नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि यह पूरा विवाद उस समय और गहरा गया जब न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने आरोपियों की रिक्यूजल याचिका को खारिज कर दिया था। आरोपियों का तर्क था कि न्यायाधीश के परिजनों का संबंध केंद्र सरकार की कानूनी पैनल से है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया था।

इस मामले में सीबीआई द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई है, जिसमें सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इसी अपील पर वर्तमान में हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।

राजनीतिक बयानबाजी और पत्राचार के इस दौर ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, जबकि न्यायिक प्रक्रिया अपने निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ रही है।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox