मुफ़्त राशन योजना में सरकार का बड़ा बदलाव, 3 शहरों में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत!

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June 7, 2026

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मुफ़्त राशन योजना में सरकार का बड़ा बदलाव, 3 शहरों में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत!

-अब नहीं लगाना होगा अंगूठा -डिजिटल फूड कूपन से मिलेगा मुफ़्त राशन

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  सरकार मुफ्त राशन योजना में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। अगले महीने चंडीगढ़, पुडुचेरी और गुजरात के तीन जिलों में डिजिटल फूड करेंसी के जरिए मुफ्त राशन देने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को अब अंगूठा लगाने या बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की जरूरत नहीं होगी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इस पायलट प्रोजेक्ट में सीमित संख्या में लाभार्थियों को सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित डिजिटल फूड कूपन दिए जाएंगे। ये कूपन हर महीने सीधे लाभार्थियों के मोबाइल फोन में मौजूद आरबीआई-इनेबल्ड डिजिटल वॉलेट में भेजे जाएंगे। लाभार्थी राशन की दुकान पर दुकानदार का क्यूआर कोड स्कैन कर अपना मुफ्त अनाज ले सकेंगे।

सरकार का कहना है कि इस पहल का मकसद देश की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा योजना में पारदर्शिता बढ़ाना और गड़बड़ियों पर रोक लगाना है। साथ ही, इससे राशन कार्ड धारकों को बायोमेट्रिक फेल होने जैसी परेशानियों से भी राहत मिलेगी।
अधिकारियों के मुताबिक, यह योजना डिजिटल फूड करेंसी के लिए प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (POC) के तौर पर लागू की जा रही है। इसे छोटे स्तर पर चलाया जाएगा ताकि इसकी व्यवहारिकता और तकनीकी क्षमता का आकलन किया जा सके। डिजिटल कूपन के जमा होने से बचाने के लिए इनके इस्तेमाल की एक तय समय सीमा भी निर्धारित की जाएगी।

इस महीने की शुरुआत में अहमदाबाद में 25 लाभार्थियों के साथ इस योजना का सॉफ्ट लॉन्च किया गया था। अधिकारियों के अनुसार, अब तक करीब 2,000 ट्रांजैक्शन सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। अगले महीने शुरू होने वाले पायलट में गुजरात के आनंद, साबरमती और दाहोद जिले शामिल होंगे।
चंडीगढ़ और पुडुचेरी में पहले से ही अनाज के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था लागू है, जहां लाभार्थियों को नकद राशि दी जाती है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल फूड करेंसी से यह सुनिश्चित होगा कि सब्सिडी की रकम सिर्फ अनाज खरीदने में ही इस्तेमाल हो।

सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि उन लाभार्थियों को इस योजना से कैसे जोड़ा जाए, जिनके पास अभी स्मार्टफोन नहीं हैं और जो केवल बेसिक या फीचर फोन का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर काम किया जा रहा है।

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