माघी पूर्णिमा पर सुबह 8 बजे तक 90 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930  
June 6, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

-अलसुबह से घाटों पर भीड़, सुरक्षा के कड़े इंतजाम                                     -स्नान, पूजन और कल्पवास का समापन -त्रिवेणी संगम पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब,

प्रयागराज/उमा सक्सेना/-    प्रयागराज में माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर त्रिवेणी संगम पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। तड़के से ही लाखों श्रद्धालु संगम तट की ओर उमड़ पड़े और गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के संगम में पवित्र स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। सुबह की पहली किरण के साथ ही घाटों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं और पूरा क्षेत्र ‘हर-हर गंगे’ व ‘जय गंगा मैया’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु विधि-विधान से स्नान, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान करते नजर आए। प्रशासन के अनुसार सुबह 8 बजे तक करीब 90 लाख लोगों ने संगम में डुबकी लगा ली थी, जिससे पूरा मेला क्षेत्र श्रद्धा के महासागर में तब्दील हो गया।

सुरक्षा और व्यवस्थाएं चाक-चौबंद
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। संगम घाट और आसपास के इलाकों में पुलिस, एटीएस, बम निरोधक दस्ते और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद रहीं। भीड़ प्रबंधन के लिए बैरिकेडिंग, ह्यूमन चेन और दिशा-निर्देशन की विशेष व्यवस्था की गई, ताकि किसी प्रकार की अफरा-तफरी न हो। प्रशासन ने खोया-पाया केंद्र भी सक्रिय रखा है, जिससे बिछड़े लोगों को तुरंत मिलाया जा सके।

संतों और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
धार्मिक गुरुओं ने माघी पूर्णिमा के स्नान को आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक बताया। संतों का कहना है कि त्रिवेणी में स्नान करने से मानसिक और आध्यात्मिक शांति मिलती है तथा जीवन की नकारात्मकता दूर होती है। वहीं दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि सुविधाएं बेहतर हैं और प्रशासन पूरी तरह सहयोग कर रहा है।

कल्पवास का समापन
पौष पूर्णिमा से शुरू हुआ कल्पवास माघी पूर्णिमा के स्नान के साथ संपन्न हो रहा है। एक माह तक संगम तट पर रहकर साधना और नियमों का पालन करने वाले कल्पवासी आज पवित्र स्नान के बाद अपने घरों को लौट रहे हैं। यह दृश्य आध्यात्मिक ऊर्जा, आस्था और भारतीय परंपराओं का जीवंत उदाहरण बन गया।

कुल मिलाकर, माघी पूर्णिमा पर प्रयागराज का संगम क्षेत्र भक्ति, विश्वास और सनातन संस्कृति की झलक से सराबोर नजर आया, जहां हर तरफ श्रद्धा का सागर उमड़ता दिखाई दिया।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox