बाज़ार का दूध बना रहा मानसिक रूप से बीमार? रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

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September 30, 2026

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बाज़ार का दूध बना रहा मानसिक रूप से बीमार? रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

मानसी शर्मा/-  कौशाम्बी फाउंडेशन और डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स के संयुक्त तत्वावधान में जेपी सभागार में 3दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इंटरनेशनल कांफ्रेंस इन मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च एंड प्रैक्टिस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड इनोवेशन कार्यशाला में देशभर के 350से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला के दूसरे दिन कई शोधकर्ताओं ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इनमें डीईआई विश्वविद्यालय की डॉ. आंचल ने मिलावटी दूध के कारण हो रहे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक नुकसान पर अपना शोध प्रस्तुत किया।
भारत दुनिया में सबसे अधिक दूध उत्पादन करने वाला देश है। लेकिन फिर भी यहां दूध के उत्पादन और खपत के बीच बड़ा अंतर है। इस अंतर को कम करने के लिए देश में मिलावट का फ़ॉर्मूला अपनाया जा रहा है।

मिलावटी दूध से हो रही है बीमारियां

डॉ. आंचल के शोध के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 319लाख मीट्रिक टन दूध का उत्पादन हो रहा है। जबकि जरूरत 426लाख मीट्रिक टन की है। इस अंतर को पूरा करने के लिए दूध में डिटर्जेंट, यूरिया और स्टार्च जैसे हानिकारक पदार्थ मिलाए जा रहे हैं। डिटर्जेंट से चक्कर आना, उल्टी और पेट दर्द जैसे लक्षण सामने आते हैं। स्टार्च से किडनी खराब होने की संभावना बढ़ती है।

इसके अलावा, नकली दूध का सेवन मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालता है। यह याद्दाश्त कमजोर करता है और बोलने की क्षमता को प्रभावित करता है।

कैसे करें मिलावटी दूध की पहचान?

डॉ. आंचल का कहना है कि लेबोरेटरी में फिजिकल डिडक्शन मेथड के जरिए दूध में मिलावट का पता लगाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, दूध में चावल के पानी या यूरिया की मिलावट होने पर उसका रंग बदल जाता है।  उन्होंने सुझाव दिया कि आम उपभोक्ताओं को जागरूक करने और एक ऐसा उपकरण विकसित करने की जरूरत है। जिससे आसानी से दूध में मिलावट की पहचान की जा सके। इससे मिलावटी दूध के सेवन से बचाव संभव हो सकेगा।

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