फर्जी दस्तावेज़, लेकिन कोई फायदा नहीं? धोखाधड़ी नहीं – सुप्रीम कोर्ट

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

September 2026
MTWTFSS
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930 
September 30, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

फर्जी दस्तावेज़, लेकिन कोई फायदा नहीं? धोखाधड़ी नहीं – सुप्रीम कोर्ट

-अदालत ने कहा, धोखाधड़ी का मामला तभी जब आरोपी को मिला हो प्रत्यक्ष लाभ

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (10 सितंबर) को एक शैक्षणिक संस्थान के प्रमुख के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला खारिज कर दिया, जिस पर एफिलिएशन लेने के लिए अग्निशमन विभाग के फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया था। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि किसी कॉलेज की मान्यता प्राप्त करने के लिए अग्निशमन विभाग के फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) का कथित रूप से प्रस्तुत करना धोखाधड़ी या जालसाजी नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह दस्तावेज न तो एफिलिएशन प्राप्त करने के लिए कानूनी रूप से आवश्यक था और न ही शिक्षा विभाग को एफिलिएशन प्रदान करने के लिए प्रेरित किया गया था।

क्या है मामला?
लाइव लॉ वेबसाइट के मुताबिक अपीलकर्ता, एक शैक्षणिक संस्था का प्रमुख, 14.20 मीटर ऊंची इमारत में एक कॉलेज संचालित करता था। उसके खिलाफ शिक्षा विभाग को जाली अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जमा करने का आरोप लगाते हुए एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। जिला अग्निशमन अधिकारी की शिकायत के आधार पर, पुलिस ने धारा 420 आईपीसी (धोखाधड़ी) के तहत आरोप पत्र दायर किया, हालांकि जाली दस्तावेज बरामद नहीं हुआ।

राष्ट्रीय भवन संहिता, 2016 के तहत, 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले शैक्षणिक भवनों के लिए अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) की आवश्यकता नहीं है। उच्च न्यायालय ने पहले शिक्षा विभाग को ऐसे भवनों के लिए एनओसी पर जोर दिए बिना संबद्धता नवीनीकृत करने का निर्देश दिया था, और अनुपालन न करने पर अवमानना कार्यवाही भी शुरू की थी।

अपीलकर्ता ने क्या कहा?
अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि धोखाधड़ी का कोई मामला नहीं था क्योंकि उसके शैक्षणिक संस्थान को संबद्धता प्रदान करने के लिए कोई बेईमानी पूर्ण प्रलोभन नहीं दिया गया था, क्योंकि 15 मीटर से कम ऊंचाई वाली इमारतों के लिए अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जमा करने की ‘कोई आवश्यकता नहीं’ थी। उच्च न्यायालय के निर्णय को रद्द करते हुए, न्यायमूर्ति बागची द्वारा मामले पर निर्णय देने से पहले धोखाधड़ी के अपराध के तत्वों पर हर स्तर से चर्चा की गई।

About Post Author

Subscribe to get news in your inbox