पपरावट में चंदे के पैसे से की ग्रामीणों ने चौपाल की मरम्मत

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पपरावट में चंदे के पैसे से की ग्रामीणों ने चौपाल की मरम्मत

-सरकारी उपेक्षा के बाद ग्रामीणों ने स्वयं उठाया बिड़ा, कर दी मिसाल पेश

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/मटियाला/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- सरकार के दिल्ली में विकास के दांवों की उस समय हवा निकल गई जब पपरावट गांव के ग्रामीणों ने पिछले एक दशक से मरम्मत की बांट जोह रही हरिजन चौपाल की मरम्मत चंदा इक्ट्ठा कर करवा दी। लोगों का आरोप है कि पिछले एक दशक से जर्जर हो चुकी हरिजन चौपाल की मरम्मत के लिए कई बार प्रशासनिक अधिकारियें व विधायक से संपर्क किया गया था और उन्हे समस्या से अवगत कराया था लेकिन न तो अधिकारियो और न ही विधायक ने उनकी सुनी जिसपर ग्रामीणों ने किसी भी हादसे से बचने के लिए चंदा इक्ट्ठा कर इस चौपाल की मरम्मत करा दी है।
                   इस संबंध में ग्रामीण अशोक अहलावत ने बताया कि पिछले काफी से हरिजन समाज के लोग इस चौपाल की मरम्मत को लेकर अधिकारियों व विधायक के चक्कर काट रहे थे लेकिन किसी ने भी उनकी समस्या पर ध्यान नही दिया जिसपर ग्रामीणों ने इस चौपाल की स्वयं मरम्मत कराने का बिड़ा उठाया और ग्रामीणों ने 25 हजार का चंदा इक्ट्ठा कर इस चौपाल की मरम्मत का कार्य आरंभ किया। साथ ही उन्होने बताया कि पिछले ढाई साल से हरिजन बस्ती की गली खुदी पड़ी है। जिसे पेयजल लाइन डालने व कनेक्शन देने के लिए खोदा गया था लेकिन अभी तक ठीक नही हुई है। कई बार अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया है। फिर भी कोई सुनवाई नही कर रहा है। बुजुर्गों व बच्चों का घरों से निकलना दुभर हो गया है। कई लोगों अंधेरे में दुर्घटना का शिकार हो चुके है। लेकिन अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे है। लगता है यह काम भी अब ग्रामीणों को ही करना पड़ेगा।
                वहीं स्थानीय निवासी राकेश कुमार ने बताया कि सालों से टूटी चौपाल का गिरने का डर बना हुआ था। गरीब लोग चौपाल जर्जर होने के चलते विवाह शादियों के लिए लुटपिट रहे थे। जिसे लेकर ग्रामीणों ने यह बिड़ा उठाया और मरम्मत कर डाली। लोगों का कहना है कि जर्जर चौपाल में कोई भी समारोह करते वक्त उसके गिरने का खतरा बना रहता था। जिसकारण गरीबों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। अब ग्रामीणों के सामने गली बनाने का कार्य बचा है जिसे कैसे पूरा किया जाये इस पर मंत्रणा चल रही है। लोगों का कहना है कि जब सरकार उनकी मूलभूत सुविधाओं को भी पूरा नही कर रही है तो किस विकास के दांवे कर रही है।            

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