द्वारका वार्ड 121 में त्रिकोणीय हुआ मुकाबला, निर्दलीय प्रत्याशी कुमकुम पड़ रही सब पर भारी

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द्वारका वार्ड 121 में त्रिकोणीय हुआ मुकाबला, निर्दलीय प्रत्याशी कुमकुम पड़ रही सब पर भारी

-कुमकुम के चुनावी कैंपेन ने उड़ा दी पार्टी प्रत्याशीयों की नींद

द्वारका/नई दिल्ली/- द्वारका वार्ड 121 में प्रत्याशियों के तेज पकड़ते चुनावी कैंपेन से मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। वैसे तो अभी तक भाजपा व आप में ही मुकाबला दिखाई दे रहा था लेकिन अचानक निर्दलिय प्रत्याशी कुमकुम के चुनावी कैंपेन ने à बता दें कि निर्दलीय प्रत्याशी श्रीमती कुमकुम, स्वभाव से विनम्र शालीन एवं जन सेवा को समर्पित रही है। कुमकुम पिछले to iवर्षों से समाज सेवा के क्षेत्र में हमेशा अग्रणी रही हैं। वह महिलाओं के उत्थान के लिए हमेशा काम करती रही हैं और क्षेत्र की महिलाऐं ही उनके लिए आगे आकर चुनाव प्रचार कर रही हैं। जिसकारण वह अब मुकाबले में आ गई हैं। हालांकि वार्ड नंबर 121 में आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी कैप्टन शालिनी और बीजेपी के प्रत्याशी रामनिवास में अभी तक सीधा मुकाबला नजर आ रहा था लेकिन अब कुमकुम दोनों ही वार्डों ककरोला और द्वारका से मैदान में उतरी है। उनका चुनाव निशान सिलाई मशीन है जो महिलाओं से ही जुड़ा हुआ है। कुमकुम सोसायटी और पुनर्वास कॉलोनी दोनों में अपनी लोकप्रियता के चलते बहुत ही रफ्तार के साथ सभी दलों को टक्कर देती नजर आ रही है। जनता में अपनी गहरी पैठ अपनी राजनीतिक सूझबूझ के चलते हैं वह सभी दलों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। महिलाओं में विशेष तौर पर इनका बड़ा ही क्रेज देखा जा रहा है। लगातार पद यात्राओं में जुड़ता हुआ जन सैलाब इस बात का द्योतक है कि कुमकुम का चुनाव प्रबंधन एवं राजनैतिक कौशल उत्कृष्ट श्रेणी का है।


पिछले दिनों आम आदमी पार्टी के विधायक के साथ जो घटना घटित हुईं उससे आम आदमी पार्टी को घटते जनाधार के साथ देखा जा रहा है। वहीं बीजेपी द्वारा पूर्वांचली उम्मीदवारों की अनदेखी ने भी कुमकुम के पक्ष को मजबूत बनाया है। पूर्वांचल की होने के नाते भी सकारात्मक एवं भावनात्मक वोट बैंक इनके साथ जुड़ता दिख रहा है जिसका सीधा-सीधा फायदा कुमकुम को मिलता दिखाई दे रहा है लेकिन इसका नुक्सान बीजेपी को होता दिखाई दे रहा है। जिसके दम पर सामान्य सीट पर एक निर्दलीय उम्मीदवार दिग्गजों से दो- दो हाथ करती हुईं दिख रहीं है।

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