दो शूटर गिरफ्तार – द्वारका जिले की टीम ने की बड़ी कार्रवाई

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दो शूटर गिरफ्तार – द्वारका जिले की टीम ने की बड़ी कार्रवाई

-घटना का खुलासा: तेज़ एक्शन में आई पुलिस

नई दिल्ली/द्वारका/उमा सक्सेना/-         द्वारका जिले की एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वाड (AATS) और एंटी नारकोटिक्स सेल की संयुक्त टीम ने नजफगढ़ क्षेत्र में हुई अंधाधुंध गोलीबारी के मामले का सफलतापूर्वक खुलासा करते हुए दो पेशेवर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह घटना 28 अक्टूबर 2025 को अंजाम दी गई थी, जब अरजन पार्क इलाके में एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला किया गया। मौके से कई कारतूस बरामद हुए थे। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस गंभीर मामले की जांच शुरू की थी।

गैंग के इशारे पर चली थीं गोलियां
पुलिस जांच में सामने आया कि यह हमला अपराधी हिमांशु उर्फ बहू और नवीन बाली के निर्देश पर किया गया था। गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी — मनीष उर्फ मोनी और हिमांशु — ने स्वीकार किया कि उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क कर इस वारदात को अंजाम देने का आदेश दिया गया था। घटना के बाद, दोनों अपराधी निर्देशानुसार मसूरी (उत्तराखंड) भाग गए थे, जहाँ से पुलिस टीम ने उन्हें धर दबोचा।

घटना का सिलसिला: दोस्ती से दुश्मनी तक
पूछताछ में खुलासा हुआ कि इस हमले की जड़ में पुरानी रंजिश थी। जेल में बंद अपराधी दीपक का झगड़ा शिकायतकर्ता रोहित लांबा से हुआ था। रिहा होने के बाद दीपक ने हिमांशु उर्फ बहू के साथ मिलकर रोहित को खत्म करने की साजिश रची। दीपक ने दोनों शूटरों को पहले एक स्कॉर्पियो और फिर ब्रेज़ा कार किराए पर लेकर रोहित की निगरानी करने का निर्देश दिया। उसने पीड़ित का फोटो भी दिया और कहा कि काम पूरा होने पर बड़ी रकम दी जाएगी। हमले के बाद आरोपी बापरोला और बहादुरगढ़ के रास्ते कार लौटाकर फरार हो गए।

टीम की सूझबूझ से मिली सफलता
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी ऑपरेशंस रामअवतार की निगरानी में इंस्पेक्टर कमलेश कुमार (AATS) और इंस्पेक्टर सुभाष चंद (एंटी नारकोटिक्स सेल) के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम में कई अनुभवी अधिकारी और सिपाही शामिल थे। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया गया और स्थानीय सूत्रों की मदद ली गई।
30 अक्टूबर को तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर टीम मसूरी पहुँची, जहाँ से दोनों संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और पृष्ठभूमि
गिरफ्तार शूटरों की पहचान मनीष उर्फ मोनी (27) और हिमांशु (22) के रूप में हुई है। मनीष, जो दिचाऊं कलां का निवासी है, एयर कंडीशनर मरम्मत का कार्य करता है और उसने 12वीं तक पढ़ाई की है। हिमांशु मूल रूप से मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला है और वर्तमान में द्वारका में कंप्यूटर कोर्स कर रहा है। दोनों आरोपी अपराध जगत से जुड़े लोगों के संपर्क में थे।

जांच में सामने आए तकनीकी साक्ष्य
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वे मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल हमले की साजिश और संपर्क साधने में किया गया था। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई है, जिससे भविष्य में भी इस गिरोह पर शिकंजा कसने में मदद मिलेगी।

यह मामला थाना नजफगढ़ में दर्ज एफआईआर संख्या 331/25 के तहत दर्ज किया गया था। अब आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही घटना की गुत्थी सुलझ गई है। पुलिस आगे इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों को जल्द अदालत में पेश किया जाएगा और साजिशकर्ताओं तक भी कार्रवाई की जाएगी।

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