दिल्ली जल बोर्ड की अनदेखी से पालम गांव और द्वारका सेक्टर-7 में गहराया जल संकट  

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October 8, 2026

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-लोग पीने को मजबूर दूषित पानी

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   राजधानी के पालम गांव और द्वारका सेक्टर-7 के रामफल चौक के पास स्थित डी-24/25 इलाके में जल आपूर्ति व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड की उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही के कारण उन्हें साफ पानी तक नसीब नहीं हो रहा। जगह-जगह टूटी पाइपलाइनें, अवैध कनेक्शन और रिसाव की समस्या ने हालात और खराब कर दिए हैं, जिससे घरों तक पहुंच रहा पानी दूषित हो चुका है और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

टूटी पाइपलाइनें और अवैध कनेक्शन बने मुसीबत की जड़
फेडरेशन ऑफ साउथ एंड वेस्ट डिस्ट्रिक्ट वेलफेयर फोरम के अध्यक्ष रणबीर सिंह सोलंकी के अनुसार, इलाके में कई स्थानों पर पानी की पाइपलाइनें जर्जर अवस्था में हैं। कहीं से पानी बह रहा है तो कहीं खुले गड्ढों में गंदगी मिलकर सप्लाई को प्रदूषित कर रही है। अवैध लाइनों के कारण न केवल जल बर्बादी बढ़ी है बल्कि पेयजल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। इससे जलजनित बीमारियों की आशंका लगातार बनी हुई है।

स्वीकृति के बावजूद अधूरा पड़ा पाइपलाइन कार्य
उन्होंने बताया कि करीब 250 मीटर लंबी नई पाइपलाइन बिछाने की मंजूरी फरवरी 2025 में ही मिल चुकी थी, ताकि समस्या का स्थायी समाधान हो सके। लेकिन लगभग दस महीने बीतने के बाद भी यह काम पूरा नहीं हो पाया। संबंधित अधिकारियों ने एक सप्ताह में कार्य पूरा करने का भरोसा दिया था, मगर जमीनी स्तर पर कोई प्रगति दिखाई नहीं दे रही।

स्थानीय लोगों में रोष, प्रशासन पर सवाल
निवासियों का कहना है कि विभागीय ढिलाई और कुछ जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के कारण परियोजना लटकी हुई है। लोगों को मजबूरन बाजार से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है, जबकि घरेलू जरूरतों के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा। बुजुर्गों और बच्चों वाले परिवारों को सबसे ज्यादा दिक्कत झेलनी पड़ रही है।

उच्च स्तरीय जांच की मांग
फेडरेशन ने मुख्यमंत्री, जल मंत्री प्रवेश वर्मा और दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ कौशल राज शर्मा से मामले में तत्काल दखल देने की अपील की है। संगठन ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और लंबित पाइपलाइन कार्य को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को सुरक्षित पेयजल मिल सके।

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