डीबीटी से सरकार ने की चार लाख करोड़ रुपये की बचत : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

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August 17, 2026

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डीबीटी से सरकार ने की चार लाख करोड़ रुपये की बचत : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

-बुनियादी ढांचे के विकास पर सरकार का मुख्य ध्यान, देश को चाहिए विश्वस्तरीय बैंक

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-      भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) प्रणाली के माध्यम से सरकार ने अब तक चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है। उन्होंने यह बात भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा आयोजित 12वें बैंकिंग और इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव 2025 में कही।

सीतारमण ने बताया कि केंद्र सरकार ने पिछले दशक में 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला, जो भारत की नीतियों की पारदर्शिता और प्रभावशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “वैश्विक मूल्य श्रृंखला वर्तमान में विघटनकारी दौर से गुजर रही है, ऐसे में भारत का फोकस मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण पर है।”

“2014 के बाद हुए ऐतिहासिक सुधारों से आसान हुआ कारोबार”
वित्त मंत्री ने कहा कि 2014 के बाद सरकार ने Ease of Doing Business यानी कारोबार को आसान बनाने के लिए अनेक क्रांतिकारी सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में पिछले कुछ वर्षों में पाँच गुना तक वृद्धि हुई है, जिससे विकास परियोजनाओं को गति मिली है।

सीतारमण ने यह भी बताया कि डेटा की लागत 2014 में 300 रुपये प्रति जीबी से घटकर आज केवल 10 रुपये प्रति जीबी रह गई है, जिससे डिजिटल इंडिया अभियान को बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि “भारत तकनीक-आधारित विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, और यह जनता के जीवन को सरल बनाने का माध्यम बन रहा है।”

“देश को बड़े और विश्वस्तरीय बैंकों की जरूरत” — सीतारमण
कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को विश्व स्तर के मजबूत बैंकों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में रिजर्व बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं के साथ चर्चा जारी है।

उन्होंने बताया कि सरकार बड़े और प्रभावी बैंकों के निर्माण के लिए बैंकिंग प्रणाली को सुदृढ़ और समेकित (Consolidated) करने पर काम कर रही है। सीतारमण ने कहा कि “हम आरबीआई और बैंकों के साथ चर्चा कर रहे हैं ताकि भारत में मजबूत, पारदर्शी और वैश्विक स्तर के बैंक विकसित किए जा सकें।”

आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया जारी
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने आईडीबीआई बैंक में अपनी 51% हिस्सेदारी एलआईसी को बेचकर निजीकरण की प्रक्रिया की शुरुआत की थी। इसके बाद अक्टूबर 2022 में सरकार और एलआईसी ने अपनी कुल 60.72% हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री के लिए निवेशकों से रुचि पत्र (EOI) आमंत्रित किए। जनवरी 2023 में सरकार को कई निवेशकों से ईओआई प्राप्त हुए।

अगस्त 2025 में सेबी ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश पूरा होने के बाद एलआईसी को सार्वजनिक शेयरधारक के रूप में पुनर्वर्गीकृत करने की मंजूरी भी दे दी है।

बैंकों के विलय से हुई वित्तीय प्रणाली सुदृढ़ — संख्या 27 से घटकर 12
वित्त मंत्री ने बताया कि 2017 में जहां देश में 27 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 12 रह गई है। उन्होंने कहा कि बैंकों के विलय से वित्तीय स्थिरता और दक्षता में सुधार हुआ है।

1 अप्रैल 2020 से कई बैंकों का एकीकरण प्रभावी हुआ —

यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का पंजाब नेशनल बैंक में विलय।

सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में विलय।

इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय।

आंध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में विलय।

इससे पहले विजया बैंक और देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय किया गया था, और एसबीआई के पांच सहयोगी बैंकों व भारतीय महिला बैंक को भी भारतीय स्टेट बैंक में मिलाया गया था।

बुनियादी ढांचा निर्माण और निवेश को मिलेगी नई रफ्तार
सीतारमण ने कहा कि सरकार पूंजीगत व्यय में तेजी और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि जीएसटी दर में कटौती से बढ़ी मांग अब निवेश को नई दिशा देगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि “सरकार का उद्देश्य एक ऐसा भारत बनाना है जो तकनीक, नवाचार, निवेश और पारदर्शिता के माध्यम से विश्व अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाए।”

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