जांच रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को बड़ा झटका, सामने आए गंभीर खुलासे

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जांच रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को बड़ा झटका, सामने आए गंभीर खुलासे

-समिति की 64 पन्नों की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें उस वक्त और बढ़ गईं, जब सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति ने उनके खिलाफ इंपिचमेंट का प्रस्ताव लाने की सिफारिश की। बता दें, मार्च 2025 में उनके सरकारी आवास के स्टोर रूम में आग लगने के बाद जली हुई नोटों की गड्डियां बरामद हुई थी। अब यह मामला तूल पकड़ चुका है। समिति की 64 पन्नों की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि स्टोररूम पूरी तरह जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के नियंत्रण में था।

जांच में चौंकाने वाले खुलासे
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति, जिसमें जस्टिस शील नागू, जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस अनु शिवराम शामिल थे। उन्होंने 55 गवाहों से पूछताछ की और जस्टिस वर्मा का बयान दर्ज किया। समिति ने पाया कि 30 तुगलक क्रिसेंट स्थित स्टोर रूम, जहां जली हुई नकदी मिली है, जो की आधिकारिक रूप से जस्टिस वर्मा के कब्जे में था। साथ ही, बता दें कि उस रूम में केवल वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों को ही आने-जाने की इजाजत थी। इन फैक्ट्स के आधार पर समिति ने महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने की सिफारिश की।

मार्च में शुरू हुआ विवाद
इस साल मार्च में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने के बाद स्टोर रूम से बड़ी मात्रा में अधजली नकदी बरामद हुई थी। इस घटना के बाद उन पर गंभीर आरोप लगे, जिसके चलते उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया। हालांकि, उन्हें कोई न्यायिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई। समिति ने 4 मई को अपनी रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश को सौंपी, लेकिन इसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

जस्टिस वर्मा का इनकार
जस्टिस वर्मा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार करते हुए कहा कि नकदी से उनका या उनके परिवार का कोई लेना-देना नहीं है। दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को दिए जवाब में उन्होंने दावा किया कि उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। जांच समिति की सिफारिश के बाद अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट और संसद पर टिकी हैं, जहां महाभियोग प्रस्ताव पर फैसला लिया जाएगा। यह मामला भारतीय न्यायपालिका के लिए एक गंभीर मुद्दा बन चुका है।

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