जम्मू-कश्मीर में अब प्रदेश में रहने वाले दूसरे राज्यों के लोगों को भी मिलेगा मतदान का अधिकार

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September 8, 2026

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जम्मू-कश्मीर में अब प्रदेश में रहने वाले दूसरे राज्यों के लोगों को भी मिलेगा मतदान का अधिकार

-चुनाव आयोग ने लिया फैसला, 25 लाख नये मतदाताओं के नाम वोटरलिस्ट में शामिल होने की संभावना

नई दिल्ली/- जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहटों के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा ऐलान किया है। जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी हृदेश कुमार ने कहा कि जो गैर कश्मीरी लोग राज्य में रह रहे हैं, वे अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल कराकर वोट डाल सकते हैं।
             जम्मू-कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में करीब 25 लाख नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज होने की उम्मीद है। जम्मू कश्मीर का मतदाता बनने के लिए उसे यहां के डोमिसाइल की जरूरत भी नहीं होगी। अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद जम्मू कश्मीर में पहली बार बन रही मतदाता सूचियों में इस विशेष संशोधन से करीब 25 लाख नए मतदाता बनेंगे।
             उन्होंने बताया कि कर्मचारी, छात्र, मजदूर और कोई भी गैर स्थानीय जो कश्मीर में रह रहा है, वह अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल करा सकता है। इसके अलावा जम्मू कश्मीर में तैनात सुरक्षाबलों के जवान भी वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराकर वोटिंग कर सकते हैं। घाटी के बाहर रहने वाले कश्मीरी प्रवासियों के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसी विस्थापित आबादी के लिए पहले से ही एक विशेष प्रावधान है ताकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। हृदेश कुमार ने कहा- कश्मीरी पंडित प्रवासी अपने गृह निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं।
              नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए दिल्ली, जम्मू और उधमपुर सहित विभिन्न स्थानों पर उनके लिए विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं और उन सभी को मतदाता पहचान पत्र दिए जाएंगे।“ उन्होंने जम्मू-कश्मीर में शरण लेने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को मतदाता सूची में शामिल करने के विचार को सिरे से खारिज कर दिया। जम्मू कश्मीर निर्वाचन आयोग के इस निर्णय से सियासी दलों में खलबली मच गई है और वे इसे भाजपा का एजेंडा बताने लगे हैं।
             पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में चुनावों को टालने का केंद्र सरकार का फैसला भाजपा के पक्ष में संतुलन को झुकाने और अब गैर स्थानीय लोगों को वोट देने की अनुमति देने से पहले चुनाव परिणामों को प्रभावित करना है। असली मकसद स्थानीय लोगों को शक्तिहीन करने के लिए जम्मू-कश्मीर में डंडे के बल पर शासन जारी रखना है।
             नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने भी निर्वाचन आयोग के इस फैसले का विरोध जताते हुए कहा कि भाजपा जम्मू-कश्मीर के वास्तविक मतदाताओं के समर्थन को लेकर इतनी असुरक्षित है कि उसे सीटें जीतने के लिए अस्थायी मतदाताओं को आयात करने की आवश्यकता है? जब जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का मौका दिया जाएगा तो इनमें से कोई भी चीज भाजपा की मदद नहीं करेगी।

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