कोरोना काल में अस्थायी अस्पताल के निर्माण में घोटाला, अब एसीबी करेगी जांच

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कोरोना काल में अस्थायी अस्पताल के निर्माण में घोटाला, अब एसीबी करेगी जांच

-दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने जांच एसीबी को सौंपी

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- कोरोना काल के दौरान दिल्ली सरकार द्वारा सात अस्थाई अस्पताल निर्माण में घोटाले की जांच अब एसीबी (एंटी करप्शन ब्रांच) को सौंप दी गई है। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने एंटी करप्शन ब्रांच को जांच करने की मंजूरी दे दी है। उपराज्यपाल के आदेश के बाद लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन और वर्तमान इंजीनियर इन चीफ के विरुद्ध एंटी करप्शन ब्रांच भ्रष्टाचार की जांच करेगी। इन सात अस्थाई अस्पतालों के निर्माण के लिए 1256 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था।
               दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन पहले ही मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल में बंद हैं। उसके बाद दिल्ली सरकार को अब एक और झटका लगा है। दिल्ली सरकार द्वारा वर्ष 2021 में कोरोना मरीजों के उपचार के नाम पर बनाए गए सात अस्थाई अस्पतालों के निर्माण में लोक निर्माण विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। बीजेपी के सांसद मनोज तिवारी और विधायकों ने आरोप लगाया था। यह मामला दिल्ली के राऊज एवेन्यू अदालत में भी चल रहा है। अब उपराज्यपाल ने इस पूरे मामले की जांच एसीबी को करने के निर्देश दिए.कोरोना काल में वर्ष 2021 में 1256 करोड़ की लागत से लोक निर्माण विभाग में ज़ीटीवी अस्पताल, सरिता विहार, रघुबीर नगर, शालीमार बाग, किराड़ी, सुल्तानपुरी और चाचा नेहरू अस्पताल गीता कॉलोनी में अस्थाई अस्पताल का निर्माण शुरू किया गया था। इन अस्थाई अस्पतालों के निर्माण में घोटाला होने की शिकायत बीजेपी नेताओं ने की थी। मामला अदालत में विचाराधीन है। अब इस मामले में उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस, सरकारी कामकाज में पूरी ईमानदारी से करने की नीयत से लंबित भ्रष्टाचार की जांच के आदेश दिए हैं।
               पीडब्ल्यूडी के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन इंजीनियर इन चीफ के रिटायरमेंट वाले दिन ही सैम इंडिया बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी को अस्पताल के निर्माण का काम सौंप दिया गया था। इस काम में स्ट्रक्चरल ट्यूब के दाम बढ़ने के नाम पर अस्पताल के लागत मूल्य में टेंडर नियमों को ताख पर रखकर 40 फीसद की वृद्धि कर दी गई थी। इस मामले में यह भी आरोप लगा था कि अस्थाई अस्पताल के निर्माण की परियोजना को मंजूरी बाद में मिली थी. पर पीडब्ल्यूडी ने टेंडर पहले ही फ्लोट कर दिया था। बीजेपी के सांसद व विधायकों ने इसकी शिकायत गत वर्ष तत्कालीन उपराज्यपाल अनिल बैजल से भी की थी लेकिन उन्होंने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिय. अब नए उपराज्यपाल ने मामले की जांच एसीबी को सौंप दी है। .बता दें कि इस मामले की अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान सात अप्रैल को एंटी करप्शन ब्यूरो के जांच अधिकारी प्रवीण कुमार और सतर्कता निदेशालय के सेक्शन अफसर उमाशंकर डब्ल्यू वी कोर्ट में पेश हुए थे। दोनों को कोर्ट ने दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशक को निर्देश दिया था कि वो भ्रष्टाचार के मामले में जांच की अनुमति देने के मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। दरअसल, सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी प्रवीण ने कहा था कि उन्होंने दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय को जांच की अनुमति देने के लिए जो आवेदन दिया है। वह अब भी लंबित है. उसके बाद कोर्ट ने सतर्कता निदेशालय के निदेशक से स्टेटस रिपोर्ट तलब करने का आदेश दिया था।
                बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने गत वर्ष दिल्ली में सात अस्थायी अस्पताल बनवाने में भ्रष्टाचार की जांच करने की मांग की थी। मनोज तिवारी ने केंद्र सरकार के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा को पत्र लिखकर कहा था कि दिल्ली में सात अस्थायी अस्पतालों के निर्माण में पीडब्डल्यूडी विभाग की ओर से फर्जीवाड़ा किया गया है। ये सात अस्पताल शालीमार बाग, किराड़ी, सुल्तानपुरी, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, जीटीबी, सरिता विहार और रघुबीर नगर में हैं। इन अस्थायी अस्पतालों के निर्माण के लिए एक ही कंपनी सैम इंडिया बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड को ठेका देने में पक्षपात किया गया। इस कंपनी को 1256 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया, जबकि इन अस्पतालों को बनाने में अनुमानित लागत 1216 करोड़ रुपये थी। ये भी ठेका बिना दिल्ली सरकार की अनुमति के एक ही दिन में दे दिया गया.मनोज तिवारी ने अपनी शिकायत में कहा है कि दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री सत्येन्द्र जैन, पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियर इन चीफ शशिकांत, पीडब्ल्यूडी विभाग के चीफ इंजीनियर संजीव रस्तोगी की भूमिका की जांच हो। शिकायत में कहा गया है कि शशिकांत ने अपने रिटायर होने की तिथि 31 अगस्त को अस्थायी अस्पताल के निर्माण के लिए सैम बिल्डवेल के नाम से 1256 करोड़ रुपये के तीन टेंडर स्वीकृत किए। इन अस्पतालों की टेंडर राशि को संजीव रस्तोगी ने यह कहकर बढ़ा दिया कि स्ट्रक्चरल ट्यूब की कीमत 79 हजार रुपये प्रति टन हो गयी है, जबकि इसकी कीमत 52,625 रुपये प्रति टन थी।

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