केंद्र की लापरवाही का नतीजा है कोरोना की दूसरी लहर,

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September 24, 2026

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केंद्र की लापरवाही का नतीजा है कोरोना की दूसरी लहर,

-कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने बोला केंद्र पर हमला, कहा-वैक्सीन व ऑक्सीजन का संकट केंद्र की देन

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/रोहिणी/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को केंद्र की लापरवाही बताया है। उन्होने कहा कि अगर केंद्र सरकार पहले से सतर्क होती तो देश में ऑक्सीजन की कमी नही होती और हजारों लोगों की मौत नही होती। वहीं वैक्सीन की कमी भी यही इशारा कर रही है। उन्होने कहा कि यदि केंद्र सरकार सतर्क होती तो पहली एवं दूसरी लहर के बीच मिले समय में योजनाबद्ध ढंग से तैयारी की होती तो इस संकट को टाला जा सकता था। सरकार से प्रश्न पूछने की अपनी श्रृंखला जिम्मेदार कौन के तहत उन्होंने फेसबुक पोस्ट के जरिए यह सवाल किया कि केंद्र ने महामारी वाले साल 2020 में ऑक्सीजन का निर्यात 700 प्रतिशत तक क्यों बढ़ा दिया?
                 उन्होंने यह भी पूछा कि मोदी सरकार ने अपने ही विशेषाधिकार प्राप्त समूह की ऑक्सीजन संकट की सलाह को दरकिनार क्यों किया? कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी ने कहा, महामारी की मार के पहले तक ऑक्सीजन को प्राथमिक रूप से औद्योगिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाता था, इसलिए भारत के पास ऑक्सीजन ट्रांसपोर्ट में इस्तेमाल होने वाले विशेष रूप से बनाये गए क्रायोजेनिक टैंकरों की संख्या 1200- 600 थी। कोरोना की पहली लहर एवं दूसरी लहर के बीच मोदी सरकार ने इन टैंकरों की संख्या बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया।
                 उन्होंने दावा किया, श्श्भारत ऑक्सीजन का सबसे बड़ा ऑक्सीजन उत्पादक देश है, लेकिन केंद्र सरकार की लापरवाही के चलते कोरोना की दूसरी लहर के समय ऑक्सीजन संकट खड़ा हुआ और लोगों की जानें गईं। केंद्र सरकार ने 150 ऑक्सीजन संयंत्र चालू करने के लिए बोली लगाई थी, लेकिन उनमें से ज्यादातर संयंत्र अभी भी चालू नहीं हो सके हैं।
                  प्रियंका ने यह आरोप भी लगाया, श्श्इस संकट काल में भी मोदी सरकार ने लोगों की जेब काटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। संसद की स्वास्थ्य मामलों की स्थाई समिति ने सरकार को पहले ही सुझाया था कि केंद्र सरकार को ऑक्सीजन सिलेंडर के दाम नियंत्रित करने के प्रयास करने होंगे, लेकिन ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत पिछले साल 4000 रू थी वहीँ एक साल में बढ़कर 7000 रू हो गई।
                  उन्होंने कहा, श्श् पिछले एक साल दौरान केंद्र सरकार ने कोरोना पर विजय घोषित की, संसद के अंदर मंत्रियों ने इस विजय के लिए प्रधानमंत्री का स्तुतिगान भी किया। देश के वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों से चेतावनी के बावजूद केंद्र ने दूसरी लहर के खतरे को अनदेखा किया।

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