कश्मीर में खीर भवानी मेले में दिखा कश्मीरी पंडितों का मौत के खिलाफ भक्ति का जज्बा

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October 22, 2026

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कश्मीर में खीर भवानी मेले में दिखा कश्मीरी पंडितों का मौत के खिलाफ भक्ति का जज्बा

-आतंक पर भारी कश्मीरी पंडितों की आस्था, हिंदुओं के कत्लेआम के बीच खीर भवानी मेले में जुटे 18 हजार कश्मीरी पंडित

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/श्रीनगर/शिव कुमार यादव/- कश्मीर घाटी में इन दिनों मचे आतंक पर आस्था भारी पड़ गई है। गांदरबल में आयोजित होने वाले मशहूर खीर भवानी मंदिर मेले में करीब 18 हजार कश्मीरी पंडितों के जुटने का अनुमान लगाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा यह आंकड़े दिए गए हैं। बताया गया है कि लगभग 18 हजार कश्मीरी पंडितों और भक्तों ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में माता खीर भवानी के मंदिर में ज्येष्ठ अष्टमी के अवसर पर अपने पूजनीय देवता की पूजा की है।

कश्मीर में टारगेट किलिंग का मुख्य कारण कश्मीर से भारत की संस्कृति को नुकसान पहुंचाने की साजिश हो सकता है। ऐसे में आतंकियों को डर था कि कहीं कश्मीर में हिन्दू वापस न आ जाएँ। ऐसे में आतंकी खीर भवानी मेले में विघ्न डालना चाहते थे लेकिन जैसा उन्होंने सोचा था वैसा बिलकुल नहीं हुआ। कश्मीर घाटी में आतंकवादियों के लगातार हमले और हिंदुओं के कत्लेआम की घटनाओं के बाद भी लोगों का हौसला नहीं टूटा है।
             दरअसल, खीर भवानी मेला गांदरबल के तुलमुल्ला में माता खीर भवानी मंदिर में हर साल ज्येष्ठ अष्टमी के अवसर पर आयोजित किया जाता है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पवित्र मंदिर में आते हैं। यह आयोजन वर्षों से कश्मीर घाटी में सांप्रदायिक सद्भाव और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है लेकिन पिछले दो वर्षों से महामारी के कारण आयोजित नहीं किया जा सका।
              हालांकि इस बार कश्मीर में जारी टारगेट किलिंग की घटनाओं के चलते यहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल ने खुद पूरे आयोजन की निगरानी की। मेले के बाद सरकार ने बयान जारी कर बताया कि ज्येष्ठ अष्टमी पर करीब 18000 कश्मीरी पंडितों और भक्तों ने माता खीर भवानी मंदिर के दर्शन किए। शाम की आरती में करीब 2500 कश्मीरी पंडितों ने हिस्सा लिया।

माता खीर भवानी को कश्मीरी पंडितों की देवी माना जाता है। कश्मीर में हो रही टारगेट किलिंग की घटनाओं को देखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हाइलेवल मीटिंग की थी। इसमें अमरनाथ यात्रा से लेकर खीर भवानी मेले तक की तैयारियों के बारे में जानकारी ली गई। अमरनाथ के बाद खीर भवानी मंदिर की ही सबसे ज्यादा मान्यता है। बताया जा रहा है कि खीर भवानी कार्यक्रम की सफलता आगामी अमरनाथ यात्रा के लिए भी शुभ संकेत है, जो दो साल के अंतराल के बाद हो रही है। जम्मू-कश्मीर सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि अल्पसंख्यकों की हालिया हत्याओं के बावजूद यात्रा आगे बढ़ेगी।

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