ऑस्टियोपोरोसिस डे पर विशेष-हड्डियां कमजोर होने का शरीर पर दिखने लगता है असर

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ऑस्टियोपोरोसिस डे पर विशेष-हड्डियां कमजोर होने का शरीर पर दिखने लगता है असर

-ये संकेत दिखे तो ना बरते लापरवाही, पड़ सकती है भारी

हेल्थ डेस्क/- देश में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या अब विकराल रूप धारण करती जा रही है। ऐसा नही है कि इसका कोई ईलाज नही है लेकिन अगर समय पर इसकी पहचान न हो तो यह रोग इंसान की जिंदगी नरक बना देता है। वह न जी पाता है और न ही मर पाता है। ऑस्टियोपोरोसिस होने पर हड्डियां काफी कमजोरी होने लगती हैं और हल्के से स्ट्रेस या दबाव से आसानी से टूट जाती हैं। ऑस्टियोपोरोसिस की वजह से अक्सर हिप्स, कलाई और स्पाई में फ्रैक्चर का सामना करना पड़ता है। हड्डियां लिविंग टिशू होती हैं जो टूटती और बनती रहती हैं। ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या तब होती है जब पुरानी हड्डियां टूटने के बाद नई हड्डियों का निर्माण नहीं हो पाता।
              आज ऑस्टियोपोरोसिस डे पर हम ऑस्टियोपोरोसिस बिमारी की पूर्ण जानकारी आप तक पंहुचा रहे हैं। आजकल की व्यस्त जिंदगी में लाइफस्टाइल और खानपान में लोगों की ओर से बरती जाने वाली लापरवाही के चलते हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। एक स्वस्थ शरीर के लिए हड्डियों का मजबूत होना काफी जरूरी होता है। हड्डियों के कमजोर होने का एक मुख्य कारण कैल्शियम की कमी होती है। आजकल के समय में जवान लोगों को भी हड्डियों की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसा नही है कि यह बिमारी सिर्फ महिलाओं को ही होती है। पुरूष हो या महिला यह बिमारी सभी को हो सकती है। इतना जरूर है कि हमारे देश में यह बिमारी महिलाओं में ज्यादा होती है और इसकी सबसे बड़ी वजह है लड़कियों को सही मात्रा में पौष्टिक भोजन न मिल पाना और महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान और बाद में पूरे पौष्टिक व मिनरलस नही मिल पाना। हड्डियां कमजोर होने पर जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द का सामना करना पड़ता है और कई बार जोड़ों से चरमराहट की आवाज आने लगती है। आज हम आपको कुछ ऐसे संकेतों के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आपको पता लग जाएगा कि आपकी हड्डियां कमजोर होनी शुरू हो गई हैं।  

मसूड़े कमजोर होना- हड्डियों के कमजोर होने से मसूड़ों में दिक्कत होने लगती है. जबड़े की हड्डी दांतों पर पकड़ बनाए रखती है और एक उम्र के बाद अन्य हड्डियों की तरह ये भी कमजोर हो जाती है। जबड़े की हड्डी टूटने से मसूड़े में से दांत बाहर आने लगते हैं या अलग भी हो सकते हैं। जबड़े कमजोर होने से दांत खराब भी हो सकते हैं।  

पकड़ कमजोर होना- कई स्टडी में हाथों की पकड़ और कलाई, रीढ़ और कूल्हे के हड्डियों के घनत्व के बीच एक संबंध पाया गया है। पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाओं पर हाल ही में की गई एक स्टडी में पूरे शरीर में हड्डियों के घनत्व को जानने के लिए हाथों की पकड़ की मजबूती सबसे जरूरी फिजिकल टेस्ट माना गया।

कमजोर और टूटते नाखून- अगर आपके नाखून बार-बार टूटते हैं तो हो सकता है कि आपके शरीर में कैल्शियम और कोलेजन की कमी हो। ये दोनों पोषक तत्व मजबूत हड्डियों के लिए बहुत जरूरी माने जाते हैं। कमजोर नाखून को एक शुरुआती संकेत के तौर पर देखा जा सकता है जो बताते हैं कि आपके शरीर और हड्डियों को इन महत्वपूर्ण पोषक.तत्वों की बहुत जरूरत है।

ऐंठन, मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द- विटामिन डी, कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटेशियम सहित कुछ विटामिन और मिनरल्स हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी होते हैं। इनकी कमी की वजह से शरीर में ऐंठन, मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द हो सकता हैं अगर शरीर में इन विटामिन और मिनरल्स की लगातार कमी रहती है तो आगे चलकर इससे हड्डियों को नुकसान हो सकता है।

शरीर झुक जाना- हड्डियों के फ्रैक्चर की वजह से शरीर आगे की तरफ झुकने लगता है। ये कमजोर हड्डियों का शुरुआती लक्षण हो सकता है। बिना ज्यादा भार के अगर आपकी रीढ़ की हड्डी झुक जाती है या खराब तरीके से बैठने की वजह से रीढ़ के आसपास की..मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, तो संभव है कि आपकी हड्डियां कमजोर होनी शुरू हो गई हैं।

फिटनेस में कमी- अगर आपकी फिटनेस में गिरावट आ रही है तो हो सकता है कि आपके बोन मास (हड्डियों के घनत्व) में कमी आ रही हो। स्टडी से पता चला है कि वजन कम करने वाले एक्सरसाइज से हड्डियों को नुकसान कम होता है और ये कैल्शियम और हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं के जरिए मजबूत हड्डी बनाते हैं।

दिल का तेजी से धड़कना- दिल धड़कने की औसतन दर 60 और 100 बीट्स प्रति मिनट के बीच की है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना कि प्रति मिनट 80 बीट्स से अधिक पल्स रेट होने से हिप, पेल्विस और स्पाइन फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। हृदय गति आपके फिटनेस के स्तर को बताती है।

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