एससी ने केजरीवाल के वकील से पूछे तीखे सवाल

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August 18, 2026

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एससी ने केजरीवाल के वकील से पूछे तीखे सवाल

-आपने जमानत की अर्जी क्यों नही दी, समन को क्यों किया नजरअंदाज?

नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- कथित उत्पाद शुल्क नीति घोटाले से जुड़े मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के वकील से सुप्रीम कोर्ट ने तीखें सवाल पूछे है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने सीएम के वकील अभिषेक सिंघवी से पूछा कि उन्होंने ट्रायल कोर्ट के सामने जमानत याचिका क्यों नहीं दायर की और क्यों बार-बार दिये गए सम्मनों को नजरअंदाज किया? इस पर केजरीवाल के वकील ने कहा कि कई कारण हैं जिनमें केजरीवाल की गिरफ्तारी अवैध भी शामिल है। मामले में सुनवाई चल रही है। बता दें कि ईडी ने 21 मार्च को केजरीवाल को गिरफ्तार किया था। मुख्यमंत्री फिलहाल न्यायिक हिरासत के तहत यहां तिहाड़ जेल में बंद हैं।

           दरअसल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली आम आदमी पार्टी (आप) नेता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

आपने जमानत अर्जी क्यों नहीं की दाखिल?
पीठ ने केजरीवाल की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी से पूछा, ’आपने ट्रायल कोर्ट के समक्ष जमानत के लिए कोई आवेदन नहीं दिया? पीठ ने पूछा कि आपने जमानत के लिए कोई अर्जी क्यों नहीं दाखिल की? इस पर केजरीवाल के वकील ने कहा कि कई कारण हैं, जिनमें केजरीवाल की गिरफ्तारी ’अवैध’ भी शामिल है। मामले में सुनवाई चल रही है।

21 मार्च को हुए थे अरेस्ट
बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने केजरीवाल को संघीय धन शोधन रोधी एजेंसी द्वारा दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद ईडी ने 21 मार्च को केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया था। मुख्यमंत्री फिलहाल न्यायिक हिरासत के तहत यहां तिहाड़ जेल में बंद हैं।

15 अप्रैल को ईडी ने भेजा था नोटिस
शीर्ष अदालत ने 15 अप्रैल को ईडी को नोटिस जारी किया और केजरीवाल की याचिका पर उससे जवाब मांगा। उच्च न्यायालय ने 9 अप्रैल को मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी को बरकरार रखते हुए कहा था कि इसमें कोई अवैधता नहीं है और बार-बार समन जारी करने और जांच में शामिल होने से इनकार करने के बाद ईडी के पास ’थोड़ा कम विकल्प’ बचा था।
         यह मामला 2021-22 के लिए दिल्ली सरकार की अब समाप्त हो चुकी उत्पाद शुल्क नीति के निर्माण और कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है।

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