एलबीएस संस्कृत विश्वविद्यालय में महर्षि अगस्त्य महोत्सव का भव्य आयोजन

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October 19, 2026

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एलबीएस संस्कृत विश्वविद्यालय में महर्षि अगस्त्य महोत्सव का भव्य आयोजन

दिल्ली/शिव कुमार यादव/- भारतीय ज्ञान विज्ञान एवं परम्परा के विकास में ऋषि-मुनियों का विशेष योगदान रहा है। भारतीय मान्यता है कि आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग जैसे प्राचीन विज्ञानों के जनक ऋषि-मुनि ही रहे हैं।

महर्षि अगस्त्य ने बिजली उत्पन्न करने की विधि तथा विमान चलाने की पद्धति का उल्लेख अपने द्वारा विरचित अगस्त्य संहिता एवं अन्य ग्रन्थों में किया है। महर्षि अगस्त्य आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में सिद्ध चिकित्सा जैसे अद्भुत प्रयोग को जन्म दिया।

महर्षि अगस्त्य के इस योगदान से युवापीढ़ी को जागरूक करने हेतु प्रत्येक वर्ष महर्षि अगस्त्य महोत्सव का आयोजन श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में किया जाता है। इस वर्ष छात्रों की प्रतिभागिता हेतु भाषण प्रतियोगिता करायी गयी, जिसमें सर्वदर्शन विभाग की छात्रा जीवना कुमारी ने प्रथम पुरस्कार ₹3000/- शिक्षाशास्त्री के छात्र अजीत साहू ने द्वितीय पुरस्कार ₹2000/- तथा विशिष्टाद्वैत वेदांत विभाग के छात्र ए. शिवशक्ति ने तृतीय पुरस्कार ₹1000/- प्राप्त किया।

महर्षि अगस्त्य के सिद्ध चिकित्सा, तमिल साहित्य और सांस्कृतिक एकता में योगदान को प्रकाश में लाने हेतु संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने महर्षि अगस्त्य के नैतिक योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए।

मुख्य वक्ता श्री वेंकट सुब्रमणियन नारायणन (मालन) ने ‘अगस्त्य एक विश्वगुरु’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि डॉ. अलका सिंह गुर्जर ने महर्षि अगस्त्य के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान पर प्रकाश डाला। सेवानिवृत्त वैज्ञानिक श्री एस. सत्यमणि ने तमिल साहित्य में महर्षि अगस्त्य के योगदान पर अपने विचार रखे। नीति आयोग के उप सलाहकार श्री ए. मुरलीधरन ने जल संसाधनों में महर्षि अगस्त्य के योगदान की व्याख्या की। श्री टी.एस. चंद्रमौलीश्वरन ने भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में महर्षि अगस्त्य के प्रभाव पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में कु. वैशाली द्वारा अर्धनारीश्वर स्तुति पर भरतनाट्यम् नृत्य प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के निर्देशानुसार तमिल संगम 3.0 के अन्तर्गत किया गया। इस अवसर पर कुलसचिव श्री सन्तोष श्रीवास्तव एवं अन्य आचार्य तथा अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संयोजन प्रो. ए. एस. आरावमुदन् ने किया। आयोजन में प्रो. सुदर्शनन् एस., प्रो. के. अनन्ता, डॉ. राजेश गुर्जर, डॉ. पीताम्बर, डॉ. मनोतोष आदि की विशेष भूमिका रही।

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