“उजवा में 10 दिवसीय प्रशिक्षण से ग्रामीण युवाओं को मिला उद्यमिता का नया रास्ता”

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October 19, 2026

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-KVK उजवा में फल–सब्जी प्रसंस्करण पर 10 दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने और ग्रामीण युवाओं तथा किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, उजवा, दिल्ली में “फल–सब्जी संरक्षण एवं प्रसंस्करण में उद्यमिता विकास” पर 10 दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण ग्रामीण क्षेत्र में सूक्ष्म उद्योग स्थापना और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहा।

प्रशिक्षण का उद्देश्य
कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य प्रतिभागियों को पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट, मूल्य संवर्धन तकनीक, माइक्रो फूड-प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना और बाज़ार प्रबंधन से संबंधित व्यवहारिक व तकनीकी दक्षता प्रदान करना था।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रतिभागी स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर आत्मनिर्भर बन सकें और अपना छोटा व्यवसाय शुरू करें।

उद्घाटन सत्र और विशेषज्ञों के विचार
कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. डी.के. राणा ने की। उन्होंने बताया कि भारत में तैयार की गई बड़ी मात्रा में फल–सब्जियाँ प्रसंस्करण की कमी के कारण नष्ट हो जाती हैं।
उन्होंने कहा कि जैम, जेली, स्क्वैश, अचार, चटनी, प्यूरी, डिहाइड्रेटेड सब्ज़ियाँ जैसे उत्पाद किसानों को बेहतर दाम, लंबा शेल्फ लाइफ और अधिक बाजार संभावनाएँ प्रदान करते हैं।
डॉ. राणा ने यह भी बताया कि यह क्षेत्र महिलाओं, एफपीओ, स्वयं सहायता समूहों और युवा उद्यमियों के लिए बड़े स्तर पर आय-सृजन का अवसर देता है।

प्रशिक्षण की मुख्य गतिविधियाँ एवं सामग्री
गृह विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. रीतू सिंह ने प्रतिभागियों को सैद्धांतिक व प्रायोगिक सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षित किया। प्रशिक्षण में शामिल प्रमुख विषय—

जैम, जेली, सॉस, मुरब्बा, अचार, जूस और सूखी सब्ज़ियाँ बनाने की वैज्ञानिक विधियाँ

खाद्य सुरक्षा और FSSAI मानकों की जानकारी

उद्यमिता एवं बिजनेस मैनेजमेंट

सरकारी योजनाएँ और वित्तीय सहायता विकल्प

छोटे समूहों में प्रत्यक्ष उत्पादन की प्रैक्टिस

प्रायोगिक सत्रों में प्रतिभागियों से स्वयं विभिन्न उत्पाद तैयार करवाए गए ताकि वे प्रशिक्षण के बाद सीधे इसका व्यवसाय शुरू कर सकें।

प्रतिभागियों की भागीदारी और अनुभव
प्रशिक्षण में कुल 30 किसान, महिलाएँ और युवा शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम उन्हें स्वरोजगार, माइक्रो उद्यम स्थापना और स्थानीय बाजारों में अपनी पहचान बनाने में मदद करेगा।
समापन सत्र में वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन और भविष्य में और अधिक ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का आश्वासन दिया।

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