इस बार मानसून में झमाझम बरसेंगे बदरा, अल नीनो का प्रभाव रहेगा नगण्य

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इस बार मानसून में झमाझम बरसेंगे बदरा, अल नीनो का प्रभाव रहेगा नगण्य

-मौसम विभाग के हिसाब से उत्तर भारत में इस बार सामान्य से अधिक होगी बारिश
नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/भावना शर्मा/- मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली प्राइवेट एजेंसी स्काईमेट ने 2022 का मानसून का पूर्वानुमान घोषित कर दिया है। स्काईमेट ने एलान किया है कि इस बार भारत में मानसून सामान्य रहने के अनुमान है जिसके चलते। उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश सामान्य से अधिक रहने के आसार है। इस बार बारिश से जून से शुरू होकर सितंबर तक सामान्य रहेगी और बदरा झमाझम बरसेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि इसबार मानसून पर अल नीनो का प्रभाव न के बराबर रहेगा जिसे देखते हुए पूरे उत्तर भारत में अच्छी बारिश के आसार दिखाई दे रहे हैं।
                स्काईमेट ने अपने इस अनुमान में 5 फीसदी की कमी या बढ़ोतरी का भी मार्जिन रखा है। 96 फीसदी-104 फीसदी बारिश को सामान्य कहा जाता है। एजेंसी ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि फूड बाउल के नाम से मशहूर एम-यूपी और पंजाब, हरियाणा में सामान्य से भी ज्यादा बारिश हो सकती है। जबकि, गुजरात में सामान्य से कम बारिश होगी। राजस्थान और गुजरात के साथ-साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र के नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में पूरे सीजन में बारिश कम ही होगी।
               वहीं केरल और कर्नाटक में भी जुलाई-अगस्त के दौरान कम बारिश होगी। पूर्वानुमान के अनुसार देश भर में बारिश के सीजन का पहला हिस्सा, बाद वाले की तुलना में बेहतर रहेगा। जून में मानसून की अच्छी शुरुआत होने की संभावना है।
               जून में लॉन्ग पीरियड एवरेज (166.9 मिमी) के मुकाबले 107 फीसदी बारिश हो सकती है। यानी 70 फीसदी सामान्य, 20 फीसदी अत्यधिक और 10 फीसदी कम बारिश हो सकती है। जुलाई में लॉन्ग पीरियड एवरेज (285.3 मिमी) के मुकाबले 100 फीसदी बारिश हो सकती है। यानी 65 फीसदी सामान्य, 20 फीसदी  अत्यधिक और 15 फीसदी कम बारिश होगी।  अगस्त में लॉन्ग पीरियड एवरेज (258.2 मिमी) के मुकाबले 95 फीसदी बारिश हो सकती है। यानी 60 फीसदी सामान्य, 10 फीसदी अत्यधिक और 30 फीसदी कम बारिश होगी। सितम्बर में लॉन्ग पीरियड एवरेज (170.2 मिमी) के मुकाबले 90 फीसदी बारिश हो सकती है। यानी 20 फीसदी सामान्य, 10 फीसदी अत्यधिक और 70 फीसदी कम बारिश होगी।
                पिछले 2 मानसून सीजन में बैक-टु-बैक ला नीना का असर था। इससे पहले सर्दियों के मौसम में ला नीना तेजी से घटने लगा था, लेकिन पूर्वी हवाओं के तेज होने से इसकी वापसी रुक गई है। हालांकि प्रशांत महासागर की ला नीना, दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत से पहले तक प्रबल होने की संभावना है। इसलिए आमतौर पर मानसून को बिगाड़ने वाले अल नीनो के होने से इनकार किया है।
             पूरे भारत में मानसून के 4 महीनों के दौरान औसत 880.6 मिलीमीटर बारिश होती है, जिसे लॉन्ग पीरियड एवरेज कहते हैं। यानी 880.6 मिलीमीटर बारिश को 100 फीसदी माना जाता है। स्काईमेट ने पिछले साल 907 मिलीमीटर बारिश होने की संभावना जताई थी। इस बार इसे 862.9 मिमी का आंकड़ा दिया है। अगर एजेंसी का अनुमान सही साबित होता है तो भारत में लगातार चौथे साल ये अच्छा मानसून होगा।

बारिश को मापते कैसे हैं?
1662 में क्रिस्टोफर व्रेन ने ब्रिटेन में पहला रेन गेज बनाया था। यह एक बीकर या ट्यूब के आकार का होता है जिसमें रीडिंग स्केल लगा होता है। इस बीकर पर एक फनल होती है, जिससे बारिश का पानी इकट्ठा होकर बीकर में आता है। बीकर में पानी की मात्रा को नापकर ही कितनी बारिश हुई है ये पता लगाया जाता है। ज्यादातर रेन गेज में बारिश मिलीमीटर में मापी जाती है।

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