इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026: टेक दिग्गज एक मंच पर, जानिए आपके लिए क्या है खास

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इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026: टेक दिग्गज एक मंच पर, जानिए आपके लिए क्या है खास

-आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा और कैसे करें रजिस्ट्रेशन?

नई दिल्ली/सिमरन मोरया/-  भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026’ ग्लोबल साउथ की पहली ऐसी बड़ी वैश्विक समिट है, जहां AI के असली असर पर चर्चा होगी। ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की थीम पर आधारित यह 5 दिवसीय कार्यक्रम सुंदर पिचाई, सैम ऑल्टमैन और यान लेकुन जैसे वैश्विक दिग्गजों को एक मंच पर ला रहा है। समिट का मुख्य उद्देश्य एआई तकनीक को सिर्फ अमीरों तक सीमित न रखकर गांव-कस्बों, खेती, स्वास्थ्य और शिक्षा से जोड़ना है। 400 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स के प्रदर्शन और ‘7 चक्रों’ के माध्यम से यह समिट डिजिटल डिवाइड को खत्म कर आम आदमी की जिंदगी आसान बनाने और समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।

मोबाइल में फोटो एडिट करना हो, बैंक में फ्रॉड पकड़ना हो या अस्पताल में बीमारी पहचाननी हो, हर जगह आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) आ चुका है। तेजी से बदलती AI की इसी दुनिया को समझने और आम लोगों तक पहुंचाने के मकसद से सोमवार से शुक्रवार तक भारत मंडपम में इंडिया AI इंपैक्ट समिट होगी। ग्लोबल साउथ में होने वाली यह पहली बड़ी वैश्विक AI समिट है। इसमें दुनिया के कई देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री, बड़ी टेक कंपनियों के दिग्गज भी हिस्सा ले रहे हैं। सवाल यह है कि यह समिट है क्या, इससे पहले ऐसी समिट कहां हुई थी, आम लोगों की जिंदगी पर इसका क्या असर होगा, ऐसे ही अहम सवालों के जानते हैं जवाब।

AI इंपैक्ट समिट क्या है?
इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय और इंडिया AI मिशन की पहल है। यह 5 दिन का कार्यक्रम है, जिसमें पॉलिसी, रिसर्च, इंडस्ट्री और आम भागीदारी, सबको जोड़ा गया है। सरकार ने इस समिट की थीम रखी है- ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ यानी AI का इस्तेमाल सबके भले और खुशहाली के लिए हो। मतलब, AI सिर्फ अमीर देशों या बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव-कस्बों और आम लोगों तक पहुंचे।

समिट में क्या होगा?
इंडिया AI इंपैक्ट समिट सिर्फ बातचीत का मंच नहीं होगा, बल्कि यहां एक बड़ा एक्स्पो भी लगेगा। एक्स्पो में 400 से ज्यादा प्रोजेक्ट दिखाए जाएंगे। इसमें लोग देख सकेंगे कि अभी AI में क्या नया हो रहा है और भविष्य में क्या बदलाव आने वाले हैं। एक्सपर्ट बताएंगे कि अब तक क्या रिसर्च हुई है और आगे किन विषयों पर काम चल रहा है। दुनिया भर में AI से जुड़े कौन-कौन से चैलेंज हैं, इस पर भी चर्चा होगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और शासन में AI का कैसे इस्तेमाल हो रहा, यह भी बताया जाएगा। लाखों विजिटर्स और डेलीगेट्स के आने की उम्मीद है।

इससे पहले ऐसी समिट कहां हुई थी?
भारत से पहले ब्रिटेन, साउथ कोरिया और फ्रांस में ऐसी समिट हो चुकी है। सबसे पहले 1-2 नवंबर 2023 को ब्रिटेन के ब्लेचली पार्क में ‘AI सेफ्टी समिट’ हुई थी। इसे ब्रिटिश सरकार ने आयोजित किया था। इसमें AI से जुड़े खतरों और सुरक्षा पर चर्चा हुई और ‘ब्लेचली डिक्लेरेशन’ जारी हुआ। इसके बाद 21-22 मई 2024 को साउथ कोरिया की राजधानी सियोल में ‘AI सियोल समिट’ हुई। इसमें AI को सुरक्षित और समावेशी बनाने पर जोर दिया गया। फिर 10-11 फरवरी 2025 को फ्रांस के पैरिस में ‘AI ऐक्शन समिट’ हुई। इसे फ्रांस और भारत की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित किया गया था। इसमें AI को सार्वजनिक हित और टिकाऊ विकास से जोड़ने पर चर्चा हुई थी। अब भारत में इंपैक्ट यानी AI के असली असर पर फोकस समिट हो रही है।

पहले हुईं तीनों समिट में क्या रिजल्ट निकला?
ब्रिटेन की 2023 की समिट में कहा गया कि AI को सुरक्षित, इंसान केंद्रित और जिम्मेदार बनाना जरूरी है। इसमें गोपनीयता, डेटा सुरक्षा, जवाबदेही और मानव निगरानी जैसे मुद्दों को उठाया गया। सियोल समिट 2024 में देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि AI में जोखिम को समझने और जांचने के लिए वैज्ञानिक सहयोग जरूरी है। AI सेफ्टी इंस्टिट्यूट जैसे संस्थागत स्ट्रक्चर की बात आगे बढ़ी। फिर पैरिस 2025 की समिट में कहा गया कि AI का उपयोग सार्वजनिक भलाई के लिए होना चाहिए, और डेटा के उपयोग में पारदर्शिता और जिम्मेदारी जरूरी है। अब दिल्ली की समिट इस चर्चा को आगे बढ़ाकर विकास और बराबरी की दिशा में ले जाने की कोशिश में है।

दिल्ली में हो रही समिट अहम क्यों है?
नई दिल्ली की समिट को सरकार ग्लोबल साउथ में पहली वैश्विक AI समिट बता रही है। इसका मतलब है कि विकासशील देशों की आवाज को केंद्र में रखा जाएगा। इस बार चर्चा सिर्फ AI के खतरे तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर है कि AI का फायदा गरीब और मध्यम वर्ग तक कैसे पहुंचे। सरकार ने इसे AI डिवाइड को खत्म करने की दिशा बताया है, मतलब जिनके पास तकनीक है और जिनके पास नहीं, उनके बीच की दूरी कम करना।

इस समिट से आम लोगों को क्या फायदा होगा
लोगों को AI के वास्तविक उपयोग के बारे में पता चलेगा, जैसे शिक्षा, हेल्थ, खेती और सरकारी सेवाओं में कैसे AI मदद कर सकता है।

AI सबके लिए उपलब्ध और उपयोगी कैसे बनाया जा सकता है, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक भी तकनीक पहुंच सके, कई देश और संस्थान इसका डेमो दिखाएंगे।

नई नौकरियों के बनाने और कौशल सीखने में AI ने कैसे मदद की, कंपनियां और देश इसका प्रैक्टिकल अनुभव भी दिखाएंगे।

किसानों, छात्रों, शिक्षकों और छोटे कारोबारों को ऐसे AI टूल्स के बारे में जानकारी मिल सकती है जिससे उनका काम आसान बन सकेगा।

समिट में जाने के लिए क्या करना होगा?
समिट में हिस्सा लेने के लिए आम लोगों को भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन के लिए ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर, फोटो और किसी एक सरकारी पहचान पत्र की जरूरत होगी। impact.indiaai.gov.in पर रजिस्ट्रेशन सेक्शन पर क्लिक करें। फिर डेलिगेट्स के रजिस्ट्रेशन वाला हिस्से पर क्लिक करें। फॉर्म भरने के बाद नेक्स्ट बटन पर क्लिक करें। यहां प्रोफेशन टाइप वाले हिस्से में स्टूडेंट या विजिटर को सिलेक्ट करें। पहचान पत्र सिलेक्ट करने के बाद उसकी डिटेल्स भरें और रजिस्ट्रेशन को फाइनल करें।

इंडिया AI इंपैक्ट में कौन-कौन शामिल होगा?
इंडिया AI इंपैक्ट समिट में 100 से ज्यादा देशों के डेलिगेशन के हिस्सा लेंगे। 20 सरकारों के प्रमुख, कई देशों के मंत्री और दुनिया भर की प्रमुख कंपनियों के 50 से ज्यादा CEO शामिल होंगे। इसमें भारतीय कंपनियों के प्रमुख भी होंगे। समिट में AI इकोसिस्टम से जुड़े करीब 500 लोग हिस्सा लेंगे, जिसमें इनोवेटर्स, रिसर्चर और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर शामिल हैं। भारत से मुकेश अंबानी (RIL), नटराजन चंद्रशेखरन (टाटा संस), नंदन नीलेकणी (इंफोसिस), सुनील भारती मित्तल (भारती एंटरप्राइजेज), के. कृतिवासन (TCS), रोशनी नादर मल्होत्रा (HCLTech), सलिल पारेख (इंफोसिस) आदि शामिल हो सकते हैं।

विदेश से आएंगे ये टेक दिग्गज

सुंदर पिचाई
सुंदर पिचाई गूगल और अल्फाबेट के CEO हैं। तमिलनाडु में जन्मे पिचाई 2015 में गूगल के CEO बने और तकनीकी इनोवेशन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

डेमिस हसाबिस
डेमिस हसाबिस ब्रिटिश AI साइंटिस्ट हैं। वह DeepMind के सह-संस्थापक और CEO हैं। डेमिस न्यूरोसाइंस और AI के क्षेत्र में अग्रणी रिसर्चर माने जाते हैं।

सैम अल्टमैन
सैम अल्टमैन OpenAI के सह-संस्थापक और CEO हैं। उन्होंने ChatGPT जैसे अडवांस AI मॉडल को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

डारियो अमोडेई
डारियो अमोडेई एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक और CEO हैं। इससे पहले वह OpenAI में रिसर्च उपाध्यक्ष रहे थे। अडवांस लैंग्वेज मॉडल के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।

ब्रैड स्मिथ
ब्रैड स्मिथ माइक्रोसॉफ्ट के प्रेजिडेंट हैं। कंपनी में वह कानूनी मामलों, नियामक नीतियों और तकनीकी नैतिकता से जुड़े विषयों का नेतृत्व करते हैं।

यान लेकुन
यान लेकुन मेटा में चीफ AI साइंटिस्ट हैं। डीप लर्निंग और कन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क (CNN) के विकास में उनका प्रमुख योगदान रहा है।

क्रिस्टियानो एमोन
क्रिस्टियानो एमोन क्वालकॉम के CEO हैं। सेमीकंडक्टर और 5G तकनीक के विस्तार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मोबाइल चिपसेट और कनेक्टेड डिवाइस इकोसिस्टम को आगे बढ़ाया है।

इंडिया AI इंपैक्ट समिट के 3 सूत्र
1. People
AI हर इंसान की मदद के लिए हो, चाहे वो गांव का किसान हो या शहर का स्टूडेंट। इस सूत्र का मकसद है कि आम से खास तक AI की पहुंच हो, ताकि कोई पीछे न छूट जाए। भारत जैसे देश में जहां करोड़ों लोग अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं, ये सूत्र AI को लोकल बनाने पर फोकस करता है। मतलब ऐसा AI सिस्टम जो आम लोगों की मदद करे, रोजगार बढ़ाए और सिक्योरिटी को मजबूत करे।

2. Planet
यह सूत्र कहता है कि AI इनोवेशन को पर्यावरण की देखभाल और सस्टेनेबिलिटी से जोड़ा जाए। जैसे, खेती में AI मौसम बताता है, ड्रोन से फसल की निगरानी करता है ताकि पानी और खाद की बर्बादी न हो। स्मार्ट सिटी में ट्रैफिक कंट्रोल करता है, कचरा मैनेज करता है। डेटा सेंटरों से निकलने वाली गर्मी को कंट्रोल करने के तरीके सुझाता है। मतलब, ऐसा AI सिस्टम हो, जो क्लाइमेट चेंज को कंट्रोल कर सके।

3. Progress
यह सूत्र AI के फायदों को सबके साथ बांटने पर जोर देता है, ताकि वैश्विक विकास हो। यह कहता है कि AI से समृद्धि सब तक पहुंचे। गवर्नमेंट सर्विसेज, सर्विस डिलिवरी, मोबिलिटी यानी आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी आसान बनाए। यह सूत्र AI को आर्थिक ग्रोथ का इंजन बनाता है, जहां गांव-शहर सबका विकास हो। दुनिया के देश मिलकर AI शेयर करेंगे, ताकि गरीब देश भी अमीर बन सके।

7 चक्र, जो आम लोगों को जोड़ रहे
इंडिया AI इंपैक्ट समिट 2026 के 7 चक्र AI पर वैश्विक सहयोग के मुख्य क्षेत्रों को दर्शाते हैं। ये चक्र बताते हैं कि AI को कैसे कौशल, समावेशन, सिक्योरिटी, साइंस, संसाधनों की समान पहुंच और आर्थिक विकास से जोड़ा जाए। इनका लक्ष्य है कि AI का लाभ सभी तक पहुंचे और समाज पर सकारात्मक असर पड़े।

1. ह्यूमन कैपिटल
यह चक्र लोगों को AI के लिए तैयार करने पर केंद्रित है। मतलब, नए कौशल सिखाना, युवाओं और कर्मचारियों को ट्रेनिंग देना, ताकि वे AI युग में पीछे न रहें।

2. सोशल इंपावरमेंट
इसका उद्देश्य है कि AI का फायदा समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। AI से ऐसी सेवाएं बनें जो आम लोगों की जिंदगी आसान करें और सरकारी सेवाएं बेहतर हों।

3. सेफ एंड ट्रस्टेट AI
इसका जोर है कि AI सुरक्षित, जिम्मेदार और भरोसेमंद हो। इसके लिए नियम और निगरानी की व्यवस्था जरूरी है, ताकि लोगों का डेटा सुरक्षित रहे, गलत उपयोग न हो, और लोग AI पर भरोसा कर सकें।

4. इनोवेशन एंड एफिशिएंसी
इसका मकसद है कि AI का विकास पर्यावरण के अनुकूल और संतुलित हो। बड़े AI सिस्टम बिजली और संसाधन ज्यादा लेते हैं, इसलिए जरूरी है कि AI टिकाऊ तरीके से बढ़े और अमीर-गरीब देशों के बीच तकनीकी अंतर न बढ़े।

5. साइंस
यह AI का इस्तेमाल और नई रिसर्च पर केंद्रित है। साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि रिसर्च के लिए डेटा और तकनीक तक सबकी बराबर पहुंच हो। इससे भारत वैश्विक वैज्ञानिक प्रगति में अहम भूमिका निभा सकेगा।

6. AI रिसोर्सेज
इसका मतलब है कि AI बनाने के जरूरी साधन, जैसे कंप्यूटर क्षमता, डेटा और टूल्स सबको सस्ते और समान रूप से मिलें। इससे स्टार्टअप, रिसर्चर्स और छोटे संस्थान भी AI में काम कर सकेंगे। सिर्फ बड़ी कंपनियों तक यह सीमित नहीं होगा।

7. AI फॉर ग्रोथ
यह चक्र बताता है कि AI का उपयोग सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि समाज की भलाई के लिए भी हो। जैसे रोजगार बढ़ाना, सेवाएं बेहतर करना, और ऐसी मिसालें बनाना जो दिखाएं कि AI से देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी दोनों बेहतर हो सकती हैं।

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