आयुष्मान योजना से किनारा कर रहे दिल्ली के बड़े अस्पताल,

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August 25, 2026

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आयुष्मान योजना से किनारा कर रहे दिल्ली के बड़े अस्पताल,

-नुकसान के साथ योजना में शामिल होने को तैयार नही निजी अस्पताल

दिल्ली/शिव कुमार यादव/- दिल्ली में प्रधान मंत्री जन आरोग्य योजना सिर्फ राजनीतिक प्रशंसा बटोरने का साधन बनकर रह गई है जबकि असलियत यह है कि योजना के लागू होने के दो माह बीत जाने के बाद भी बड़े व निजी अस्पताल इस योजना से किनारा कर रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में आयुष्मान योजना की सुविधा करीब 60 अस्पताल ही दे रहे हैं। जबकि दिल्ली में एक हजार से ज्यादा अस्पताल व नर्सिंग होम पंजीकृत हैं। इनमें भी ज्यादातर छोटे व मध्यम स्तर के अस्पताल या नर्सिंग होम ही आयुष्मान योजना की सुविधा दे रहे हैं जबकि दिल्ली के ज्यादातर बड़े व निजी अस्पताल इस योजना से किनारा कर रहे हैं।

दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, राजधानी में एक हजार से अधिक निजी अस्पताल व नर्सिंग होम पंजीकृत हैं। इनमें से अधिकतर अस्पताल व नर्सिंग होम योजना में शामिल होने से बच रहे हैं। निजी अस्पतालों का कहना है कि योजना के तहत इलाज के बदले किए जा रहे भुगतान का शुल्क काफी कम है। शुल्क का भुगतान लंबे समय तक नहीं हो पा रहा। इस योजना के तहत सर्जरी सहित अन्य के लिए जो शुल्क तय हैं उससे मध्यम स्तर के अस्पताल का खर्च नहीं निकल पाता है। ऐसे में कोई भी अस्पताल नुकसान के साथ योजना में शामिल होने के पक्ष में नहीं है।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह का दावा है कि इस योजना के तहत दिल्ली के फाइव स्टार अस्पतालों में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा दी जाएगी। नेशनल मेडिकल फोरम और दिल्ली अस्पताल फोरम के अध्यक्ष डॉ. प्रेम अग्रवाल का कहना है कि यह योजना काफी अच्छी है, लेकिन इसके शुल्क और भुगतान को लेकर सरकार को विचार करना चाहिए। निजी अस्पताल इस योजना में शामिल होने के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार को उनका सहयोग करना चाहिए। नियमों में सुधार करना चाहिए। उनका दावा है कि सरकारी तंत्र ने नियमों का बंधन लगाकर दिल्ली के निजी अस्पतालों से आठ हजार बिस्तर घटा दिए हैं। जबकि योजना को प्रभावी बनाने के लिए बिस्तर बढ़ाने की जरूरत है। दिल्ली की जनसंख्या को देखते हुए निजी और सरकारी अस्पतालों में एक लाख बिस्तर की जरूरत है।

एक साल से नहीं मिला पैसा :
अस्पतालों का कहना है कि दूसरे राज्यों का अनुभव है कि जिन अस्पतालों ने योजना के तहत इलाज किया। उन्हें एक साल से भुगतान नहीं हुआ। अस्पतालों का कहना है कि इस योजना के तहत निजी अस्पतालों को काफी कम भुगतान होता है।

सरकार का दावा :
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक दिल्ली के 83 अस्पताल में योजना का लाभ मिल रहा है। इसमें 59 निजी और 24 सरकारी अस्पताल हैं। इसके अलावा देशभर के पंजीकृत अस्पताल में भी मरीज इलाज करवा सकते हैं। दिल्ली में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 330369 लाभार्थियों का जबकि वय वंदना योजना के तहत 154116 वरिष्ठ नागरिकों का पंजीकरण किया जा गया है। योजना के तहत दिल्ली में अभी तक 729 लोग लाभ उठा चुके है।

ओपीडी की सुविधा नहीं :
आयुष्मान योजना में ओपीडी व बीमारी की पहचान से पहले के इलाज की सुविधा नहीं है। इस योजना में शामिल होने से पहले मरीज को बीमारी की पहचान कराना जरूरी है। पहचान के बाद निजी अस्पताल को आयुष्मान के पोर्टल पर आवेदन करना होगा। यदि उक्त बीमारी योजना में कवर होगी तो मरीज को अस्पताल में इलाज की सुविधा मिल पाएगी। ओपीडी में इलाज के दौरान कार्ड से मरीज जांच करने की मांग करते हैं, जबकि योजना में भर्ती होने के बाद ही सुविधा दी जा सकती है। कैंसर सहित दूसरी गंभीर मरीज की पहचान के लिए मरीज को निजी अस्पतालों में काफी पैसा खर्च करना पड़ता है।

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