अरावली में अवैध खनन में माफिया को खेल जारी, सुप्रीम फटकार के बाद भी प्रशासन नही अलर्ट

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August 24, 2026

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अरावली में अवैध खनन में माफिया को खेल जारी, सुप्रीम फटकार के बाद भी प्रशासन नही अलर्ट

- 200 रुपये टन का माल बेचते हैं 1400 में, पुलिस सहित सभी विभागों की मिलीभगत से चल रहा धंधा

फरीदाबाद/- दिल्ली व एनसीआर में बिगड़ते पर्यावरण को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अरावली को बचाने के लिए पहाड़ों में खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है लेकिन सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भी अरावली में अवैध खनन में माफिया व प्रशासन का खेल जारी है। पुलिस पर हमला, रात-दिन गाड़ी चलाना और जेल जाने का भी डर नहीं। दरअसल खनन माफिया के इस दुस्साहस के पीछे मोटे मुनाफे का खेल जुड़ा है। पत्थर खनन में सारा खेल चोरी का है। मोटे मुनाफे के लिए अवैध खनन का पत्थर ढोने वाले डंपर चालक जान का रिस्क लेने से भी पीछे नहीं हटते। एक ट्रक चालक ने बताया कि हर चौकी-नाके पर दिए जाने वाले घूस का खर्चा ही पेट्रोल से ज्यादा बैठता है। इसमें ट्रैफिक पुलिस, थाना, चौकी के अलावा माइनिंग, आरटीए और वन सहित सभी विभाग शामिल हैं। कई बार सख्त अधिकारी आ जाने से काम पर फर्क पड़ता है। उस दौरान हमले आदि भी हो जाते हैं। गाड़ी मालिक साफ कहता है मौके से भाग जाना बाकी हम पर छोड़ देना।

जानकारों के मुताबिक जो ट्रक 10 टन तक माल लाने के लिए पास है, उस पर 20 से 22 टन तक माल लादा जाता है। इसमें आधे का बिल बनने के बाद बाकी सारा चोरी का माल होता है। पुलिस को इन वाहनों का चालान करने की पावर नहीं होती। कुछ महीनों तक पुलिस को कार्रवाई के लिए अधिकृत किया था। उस समय करोड़ों का राजस्व पुलिस ने खनन विभाग को दिया, लेकिन करीब तीन महीने पहले पुलिस से यह पावर वापस ले ली गई।
               ओवरलोड ट्रक पहली बार पकड़े जाने पर 4.50 लाख, दूसरी बार में आठ लाख, तीसरी बार में 16 लाख और चौथी बार में गाड़ी को सीज करने का प्रावधान है। आरटीए विभाग को पावर होती है कि वह ट्रक को खनन के मामले में जब्त करे। ऐसा करने पर गाड़ी चालक व मालिक दोनों के जेल जाना पड़ता है। तीन महीने से पहले गाड़ी नहीं छूटती। मोटे चालान से बचने के लिए मंथली भी दी जाती है। दबाव बढ़ने पर खनन अधिकारी चालान की बजाय एफआईआर करवाकर दो दिन में गाड़ी छोड़ देते हैं। चालक जमानत पर बाहर आने के बाद दोबारा गाड़ी चलाने लगता है।

पाली क्रशर जोन के प्रधान धर्मवीर भड़ाना बताते हैं कि सही बिल पर पत्थर लाने पर 600 रुपये प्रति टन का खर्चा आता है। इसमें 100 रुपये माल लोडिंग व टैक्स, 100 रुपये प्रति टन किराया, 200 रुपये टन के हिसाब से पिसाई जोड़ी जाती है। कमीशन व टोल आदि मिलाकर 1400 रुपये टन तक माल की कीमत हो जाती है। फिलहाल नारनौल व राजस्थान से बिल के साथ माल आता है। तावडू में जो पत्थर निकलता है। वह अवैध खनन का है। वह लाल और नीला मिक्स पत्थर है। चोरी से लाने वालों को यह मुश्किल से 200 रुपये टन मिलता है। जबकि बाजार में वह इसे 1400 रुपये प्रति टन के हिसाब से बेचते हैं।
              सूरजकुंड स्थित अरावली की पहाड़ी से लेकर यमुना नदी में अवैध खनन का सिलसिला जारी है। जनवरी से जुलाई मध्य तक फरीदाबाद पुलिस ने अवैध खनन करने के करीब 38 मामले दर्ज किए हैं। फरीदाबाद और पलवल जिले के करीब 60 किलोमीटर क्षेत्र में यमुना नदी बहती है। इसमें रेत खनन का कोई ठेका नहीं छोड़ा गया है। इसके बावजूद रेता आसानी से मिल जाता है। अरावली में चोरी-छिपे हो रहे खनन की रोक के लिए सामाजिक कार्यकर्ता कई बार सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी में याचिका दायर कर चुके हैं।

पत्थर से भरे ट्रक को राजस्थान, नारनौल या तावडू से पाली तक लाना है तो चालक मेवाती ही होगा। दरअसल इन्हें सभी रास्तों के बारे में अच्छे से पता है। मात्र 12 से 15 हजार के वेतन के लिए ये लोग पुलिस पर हमला करने से भी नही चूकते। बेरोजगारी और कम पढे़ लिखे होने के कारण इन्हें दूसरा कोई काम नहीं मिलता। तकनीकी रूप से भी ये लोग गाड़ी के बारे में अच्छे से जानते हैं। कुछ तो ऐसे हैं जो ट्रक का इंजन तक खुद ही ठीक कर लेते हैं। एक-एक ड्राइवर पर पहले से कई  केस चलने के कारण इनका डर निकल चुका होता है। पुलिस या अन्य विभाग के लिए जो खर्चा इन्हें मिलता है, उसे बचाने के लिए पुलिस पर हमला कर देते हैं।
              डीएसपी की हत्या के बाद पाली क्रशर जोन में भी माल कम आ रहा है। ज्यादातर ट्रक चालक जो अवैध रूप से पत्थर ला रहे थे, भूमिगत हो गए हैं। कुछ मुंशी व ट्रक चालकों से बातचीत में सामने आया कि पत्थर का कारोबार चलाने वालों के अपने-अपने काम बंटे हुए हैं। सबसे महत्वपूर्ण और रिस्क का काम है, पत्थर को पुलिस, माइनिंग स्टाफ, फोरेस्ट रेंजर और आरटीए से बचाकर पाली क्रशर जोन तक पंहुचाना। इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से ट्रक चालक की होती है।
               पाली क्रशर जोन के प्रधान धर्मबीर भड़ाना ने बताया कि पहले जब फरीदाबाद में माइनिंग चालू थी तो मात्र पांच से छह हजार में एक गाड़ी माल मिलता था। दूसरे राज्यों या जिलों से पत्थर लाने का कारण माल महंगा हो गया है। अब 16 टन की गाड़ी 20 हजार में जाती है। सबसे ज्यादा खर्चा ट्रांसपोर्ट का ही होता है। ट्रक चालक ओवर लोडिंग नहीं करेंगे तो एक चक्कर पर मुश्किल से दो हजार रुपये ही कमा पाएंगे।
 
विभाग ने पत्थर चोरों के खिलाफ 332 केस दर्ज कराए हैं। राजस्थान व मेवात के रास्ते से आने वाले खनन माफिया पर नकेल कसने के लिए दूसरे राज्यों से भी पुलिस का सहयोग लिया जाएगा। जल्द ही इनके खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जाएगा। – मूलचंद शर्मा, परिवहन एवं खनन मंत्री, हरियाणा

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