SIR प्रक्रिया को लेकर बिहार विधानसभा में हंगामा, विपक्ष ने लगाया लोकतंत्र खत्म करने का आरोप

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September 22, 2026

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SIR प्रक्रिया को लेकर बिहार विधानसभा में हंगामा, विपक्ष ने लगाया लोकतंत्र खत्म करने का आरोप

पटना/अनीशा चौहान/- बिहार विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन जबरदस्त हंगामे और विरोध प्रदर्शन की भेंट चढ़ गया। सत्र के दौरान विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और जोरदार टकराव देखने को मिला।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इस प्रक्रिया को “चुनावी चोरी” करार देते हुए सदन के भीतर जमकर हंगामा किया और इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की। बात सिर्फ विधानसभा के भीतर ही नहीं रही, बल्कि विपक्षी विधायकों ने स्पीकर नंद किशोर यादव के कक्ष के सामने भी जमकर नारेबाज़ी की और प्रदर्शन किया।

विपक्ष का आरोप: कमजोर वर्गों को मतदाता सूची से हटाया जा रहा

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने SIR को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के माध्यम से बिहार में गरीब, दलित, महादलित और अल्पसंख्यक समुदायों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। तेजस्वी ने इसे “लोकतंत्र का गला घोंटने की साजिश” बताया और चेतावनी दी कि अगर इस मुद्दे पर चर्चा नहीं कराई गई, तो विपक्ष “सदन से सड़क तक” संघर्ष करेगा।

तेजस्वी यादव ने SIR की तुलना राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और केंद्र सरकार व निर्वाचन आयोग की मिलीभगत से लागू की जा रही है, जिससे आम जनता को भय और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

काले कपड़ों में उतरा विपक्ष, लगाए तीखे नारे

विपक्षी दलों के विधायक इस विरोध प्रदर्शन में काले कपड़े पहनकर शामिल हुए और हाथों में “SIR: Stealing Indian Rights” जैसे नारे लिखे प्लेकार्ड्स लेकर विधानसभा के मुख्य द्वार पर धरना दिया। स्पीकर के कक्ष के सामने विरोध करते समय सुरक्षाकर्मियों और विपक्षी विधायकों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी उत्पन्न हो गई।

सत्ता पक्ष ने बताया SIR को नियमित प्रक्रिया

वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बयान दिया कि SIR एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को बेवजह तूल देकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।

सत्ता पक्ष का कहना है कि SIR से किसी विशेष समुदाय को निशाना नहीं बनाया जा रहा, बल्कि यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया है जो लोकतांत्रिक प्रणाली को और सुदृढ़ करती है।

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