एम्स ऋषिकेश में कोरोना से निपटने को बढ़ाई जायेगी आइसोलेशन वार्ड में बेडों की संख्या

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एम्स ऋषिकेश में कोरोना से निपटने को बढ़ाई जायेगी आइसोलेशन वार्ड में बेडों की संख्या

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/ऋषिकेश/नई दिल्ली/मनोजीत सिंह/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/-                                                               अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत  ने कहा कि कोरोना वायरस कोविड 19 से डरने व घबराने की जरुरत नहीं है। उन्होंने बताया कि इससे बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित करने, घरों में रहने और सरकार द्वारा जारी अन्य दिशा निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय मुश्किलों भरा जरुर है मगर इसमें नामुमकिन कुछ नहीं है।        
                                             निदेशक एम्स पद्मश्री प्रो.रवि कांत ने बताया कि कोविड जिसे डब्ल्यू.एच.ओ द्वारा महामारी घोषित कर दिया गया है यह वायरस पहले पशुओं में पाए जाने की पुष्टि हुई थी एवं जनमानस द्वारा प्राकृतिक मूल्यों की अवहेलना के फलस्वरूप यह वायरस मनुष्यों में अधिरोपित हो गया है। जिसका पुस्तकों में भी उल्लेख किया गया है। निदेशक ने कहा कि एम्स ऋषिकेश कोविड महामारी को लेकर गंभीर है एवं निरंतर मरीजों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कर रहा है। निदेशक एम्स प्रो.रवि कांत  ने बताया कि संस्थान के आइसोलेशन वार्ड में जल्द ही बेडों की संख्या 100 से बढ़ाकर 400 की जाएगी,जिससे भविष्य में मरीजों की संख्या बढ़ने पर उनके दाखिले में दिक्कतें नहीं आएं।                                                                                                                                                                                                                                                    
                                              निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत  ने बताया कि घरों से जरुरी इंतजामातों के बिना अनावश्यक बाहर निकलने वाले लोगों के ही कोविड 19 से ग्रसित होने की आशंका है। लिहाजा हमें इससे बचाव के लिए सरकार व चिकित्सकों द्वारा जारी दिशा निर्देशों का स्वयं भी पालन करना चाहिए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि कोविड 19 से लड़ने के लिए हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर्याप्त नहीं है,लिहाजा इससे बचाव की नितांत आवश्यकता है। इसके लिए सरकारी द्वारा लागू किए गए लॉकडाउन व अन्य नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग व हाथों की भली प्रकार से साफ सफाई से ही हम इससे बच सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस वायरस से ग्रसित होने वाले लोगों में से 85 प्रतिशत लोगों को किसी बड़े अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है बल्कि उन्हें स्वयं आइसोलेशन में रहने की जरुरत पड़ती है, वशर्ते वह मधुमेह, उच्चरक्तचाप आदि जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त नहीं हों। उन्होंने बताया कि इस वायरस से ग्रसित लोगों में से पांच से 10 प्रतिशत लोगों को ही अस्पताल में भर्ती होने व वेंटीलेटर सिस्टम के सपोर्ट की आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग से हम कोरोना वायरस को शतप्रतिशत मात दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि मुहं पर मास्क लगाना जरुरी है इससे हम इस वायरस से स्वयं को भी सुरक्षित रख सकते हैं बल्कि दूसरों को भी इस बीमारी से ग्रसित होने से बचा सकते हैं। निदेशक एम्स ने कहा कि समस्त जनसमुदाय को इस महामारी के प्रकोप से सुरक्षित रखने का एकमात्र उपाय सरकार एवं उससे जुड़े स्वास्थ्य विशेषज्ञों के निर्देशों का शतप्रतिशत पालन सुनिश्चित करने मात्र से संभव है।

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