ISRO: भारत की धरती से सबसे भारी वाणिज्यिक सैटेलाइट का सफल प्रक्षेपण

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May 7, 2026

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-6100 किलो वजनी संचार उपग्रह को 16 मिनट में कक्षा में पहुंचाया

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-     भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने वर्ष 2025 के अपने अंतिम मिशन के साथ अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। इसरो ने भारत की धरती से अब तक का सबसे बड़ा और सबसे भारी संचार उपग्रह ‘ब्लू बर्ड ब्लॉक-2’ सफलतापूर्वक पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित कर दिया। इस ऐतिहासिक मिशन के तहत 6100 किलोग्राम वजनी इस सैटेलाइट को मात्र 16 मिनट में लगभग 520 किलोमीटर ऊंचाई पर कक्षा में पहुंचाया गया।

‘बाहुबली’ एलवीएम-3 रॉकेट की छठी उड़ान, तीसरा वाणिज्यिक मिशन
इस मिशन के लिए इसरो ने अपने शक्तिशाली एलवीएम-3 लॉन्च व्हीकल का उपयोग किया, जिसे इसकी भारी भार वहन क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ रॉकेट भी कहा जाता है। यह एलवीएम-3 की छठी उड़ान और तीसरा पूर्ण वाणिज्यिक मिशन था। प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 8:55 बजे किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा।

अमेरिका की कंपनी के लिए किया गया कॉमर्शियल लॉन्च
ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल (AST SpaceMobile) का है। यह लॉन्च न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच हुए व्यावसायिक समझौते के तहत किया गया। इस सफल प्रक्षेपण से वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार में इसरो की साख और मजबूत हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताई खुशी, युवाओं को बताया ताकत
इसरो की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं की प्रतिभा और समर्पण से देश का अंतरिक्ष कार्यक्रम लगातार आधुनिक और प्रभावशाली बन रहा है। एलवीएम-3 की विश्वसनीय क्षमता गगनयान जैसे भविष्य के अभियानों, व्यावसायिक लॉन्च सेवाओं और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही है।

क्यों खास है ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट
ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 अगली पीढ़ी की संचार प्रणाली का हिस्सा है। इसके सफल परीक्षण के बाद 4जी और 5जी स्मार्टफोन को सीधे सैटेलाइट से कनेक्टिविटी मिल सकेगी, बिना किसी अतिरिक्त एंटीना या विशेष हार्डवेयर के। इससे मोबाइल टावर पर निर्भरता कम होगी और दुर्गम क्षेत्रों जैसे पहाड़ों, रेगिस्तानों, समुद्रों और सीमावर्ती इलाकों तक नेटवर्क पहुंचाना संभव होगा।

आपदा के समय भी मिलेगा मजबूत नेटवर्क
यह सैटेलाइट आपदा प्रबंधन के लिहाज से भी बेहद अहम है। भूकंप, बाढ़, तूफान या भूस्खलन जैसी आपदाओं में जब ज़मीनी टेलीकॉम ढांचा नष्ट हो जाता है, तब सैटेलाइट आधारित नेटवर्क संचार व्यवस्था को बनाए रखने में सहायक होगा।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत
इसरो पहले ही एलवीएम-3 के माध्यम से चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब सैटेलाइट मिशन जैसे बड़े अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुका है। वनवेब मिशन के तहत इसरो ने दो चरणों में कुल 72 सैटेलाइट्स को कक्षा में स्थापित किया था। अब ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 की सफल लॉन्चिंग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत वैश्विक अंतरिक्ष वाणिज्य का एक भरोसेमंद और शक्तिशाली केंद्र बन चुका है।

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