कांग्रेस व सपा ने विकास दुबे एनकाउंटर पर फिर दागे सवाल, बसपा ने की जांच की मांग

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October 22, 2026

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कांग्रेस व सपा ने विकास दुबे एनकाउंटर पर फिर दागे सवाल, बसपा ने की जांच की मांग

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/यूपी/एमपी/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- कानपुर के बिकरू गांव में सीओ सहित आठ पुलिस वालों की हत्या करने वाले पांच लाख का इनामी विकास दुबे एनकाउंटर में ढेर हो गया है। एसटीएफ की गाड़ी उसे कानपुर ला रही थी। इस दौरान वाहन पलट गया। उसने हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। जिसके बाद पुलिस ने उसे मुठभेड़ में मार दिया। कल, विकास दुबे को उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर से गिरफ्तार किया गया था।
प्रियंका गांधी ने विकास दुबे एनकाउंटर को लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है। उनका कहना है कि अपराधी का अंत हो गया, अपराध और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों का क्या?
विकास दुबे के एनकाउंटर पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रश्न इस बात का है कि जिस प्रकार से वो सरेंडर हुआ या गिरफ्तार हुआ। मध्य प्रदेश पुलिस उसका श्रेय लेना चाहती है कि लेकिन ये बात साफ है कि निजी सिक्योरिटी एजेंसी के लोगों ने उसको पकड़ा था। मध्य प्रदेश पुलिस को जानकारी भी नहीं थी। पिछले 4 दिन में यूपी पुलिस ने 3 एनकाउंटर किए हैं, तीनों एनकाउंटर का घटनाक्रम एक जैसा है। मुझे तो इसकी आशंका पहले से ही थी क्योंकि इसके पास जो राज थे कि कौन सी राजनीतिक हस्तियां इससे जुड़ी थी, कौन से पुलिस के, शासकीय अधिकारी इससे मिले हुए थे। उन सब चीजों का खुलासा होता।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस पर तंज कसा। उनका कहना है कि दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज खुलने से सरकार पलटने से बचाई गयी है।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने कानपुर पुलिस हत्याकांड और दुर्दांत अपराधी विकास दुबे को मारे जाने की घटना की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराये जाने की मांग की है। मायावती ने कहा, कानपुर पुलिस हत्याकाण्ड की तथा साथ ही इसके मुख्य आरोपी दुर्दान्त विकास दुबे को मध्यप्रदेश से कानपुर लाते समय आज पुलिस की गाड़ी के पलटने व उसके भागने पर यूपी पुलिस द्वारा उसे मार गिराए जाने आदि के समस्त मामलों की माननीय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
उन्होने कहा, यह उच्च-स्तरीय जाँच इसलिए भी जरूरी है ताकि कानपुर नरसंहार में शहीद हुए 8 पुलिसकर्मियों के परिवार को सही इन्साफ मिल सके। साथ ही, पुलिस व आपराधिक राजनीतिक तत्वों के गठजोड़ की भी सही शिनाख्त करके उन्हें भी सख्त सजा दिलाई जा सके। ऐसे कदमों से ही यूपी अपराध-मुक्त हो सकता है।

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