अर्धसैनिक बलों मे थर्ड जेंडर की नियुक्ति का विरोध करेगी एसोसिएशन

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अर्धसैनिक बलों मे थर्ड जेंडर की नियुक्ति का विरोध करेगी एसोसिएशन

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/द्वारका/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- सरकार ने अब थर्ड जेंडर को सम्मान की जिंदगी जिने का एक और अवसर मुहैया कराने का फैसला किया है जिसके तहत अब अर्धसैनिक बलों में भी थर्ड जेंडर की निर्युिक्त की जायेगी। जिसके विरोध में कॉनफैडरेसन आफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वैलफेयर एसोसिएशन अपना ऐतराज जताया है और सरकार को इस फैसले पर दौबारा सोचने की अपील की है। हालांकि ग्रह मंत्रालय के हवाले से एक खबर है कि अर्धसेनिक बलों में हिजड़ों, नपुंसकों को असिस्टेंट कमांडेंट लेवल पर भर्ती करने पर विचार मांगे गए हैं। जिनको थर्ड जेंडर या ट्रांस जेंडर भी बोलते हैं और जिनकी तैनाती देश के महत्वपूर्ण ठिकानों व चीन से लगी सीमा पर तैनाती की जाएगी।
कॉनफैडरेसन आफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वैलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होने कहा कि इससे फोर्सेस के मौरल व कार्य क्षमता पर असर पड़ सकता है। जो ना नर है ओर ना ही नारी, वो सरहदों की सुरक्षा पर किस तरहां का रोल अदा करेंगे यह भी स्पष्ट नही है। इससे फोर्सेस में व्याभिचार फैलने की प्रबल संभावना बन सकती है। कमांड कंट्रोल में भारी गिरावट आने की संभावना है, दुसरे लोग फब्तियां कसेंगे जिसकी प्रबल संभावना। अर्ध सैनिक बल तो पहले ही आधे अधूरे थे अब थर्ड जेंडर को भर्ती करने पर क्या कहलायेंगे आप स्वयं सोच सकते हैं ?
कॉनफैडरेसन आफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वैलफेयर एसोसिएशन ने कहा कि एसोसिएशन माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले का आदर करती हैं लेकिन यह फैसला अर्धसैनिक बलों के लिए आत्मघाती भी साबित हो सकता है। इसके लिए सभी को सोचने की जरूरत है। हम उन्हे फौज की बजाये दूसरे कार्यों में उनकी सेवाये ले सकते है लेकिन फोर्स एक उचित माध्यम नही है। साथ ही रणबीर सिंह ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि ड्रैगन सेना, भीष्म पितामह थोडे़ ही है जो शिखंडी को देखकर हथियार नहीं चलाएंगे। रणबीर सिंह ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि जब सरहदों पर तनातनी का माहौल है और भारत की पहली पंक्ति की बार्डर गार्डींग फोर्स अर्थात् बीएसएफ ऐसे माहौल में भी साढ़े तीन महीने से ज्यादा समय में बिना डीजी के ही चल रही है। ऐसे समय में डीजी की नियुक्ति ना कर पाना कई सवाल खड़े करता है जबकि प्रधानमंत्री जी स्वयं कैबिनेट नियुक्ति समिति के चेयरमैन हैं।

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