
नजफगढ़ मेट्रो न्यूज/नई दिल्ली/ब्यूरो,: देश की राजधानी में दिल्ली में आए दिन इमारत ढहने की घटनाएं हो रही है. ताजा मामला राजधानी के सीमापुरी इलाके में न्यू सीमापुरी स्थित ईदगाह मछली मंडी के पास का है जहां एक पांच मंजिला इमारत गिर गई. जिसमें अबतक 4 लोगों की मौत हो गई जबकि आठ लोग घायल बताए जा रहा है. मरने वालों में 12 वर्षीय बच्ची, एक गर्भवती महिला व एक बच्चा शामिल है. ये कोई पहली घटना नहीं ऐसी ही घटना कुछ दिनों पहले दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुई. जहां एक जर्जर पांच मंजिला इमारत के ढहने से सात लोगों की दर्दनाक मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना ने पूरी देश को हिलाकर रख दिया है.

दरअसल, आए दिन हो रहे ये हादसें सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना नहीं है, बल्कि ‘मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2021’ (MPD-2021), ‘यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज-2016’ (UBBL-2016) के खुले उल्लंघन व प्रशासनिक एजेंसियों के लचर रवैये की पोल खोलता है.
इस हादसे ने साबित कर दिया है कि दिल्ली के घने व छात्र-बहुल रिहाइशी इलाकों (जैसे सत्य निकेतन, जीटीबी नगर, हडसन लेन, मुखर्जी नगर व लक्ष्मी नगर) में व्यावसायिक फायदे के लिए भवन निर्माण और सुरक्षा मानकों की खुलेआम बलि दी जा रही है.
क्या है FAR का गणित और क्यों तय की जाती है सीमा
‘मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2021’ और ‘यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज-2016’ के तहत किसी भी भवन निर्माण का मुख्य आधार FAR यानी ‘फ्लोर एरिया रेशियो’ होता है. FAR किसी भी प्लॉट के कुल क्षेत्रफल व उस पर बनाए जाने वाले कुल निर्मित क्षेत्रफल का अनुपात होता है. उदाहरण के तौर पर यदि 100 वर्ग गज के प्लॉट पर FAR 200 निर्धारित है, तो उस जमीन की सभी मंजिलों को मिलाकर केवल 200 वर्ग गज का निर्मित क्षेत्र ही बनाया जा सकता है. FAR का निर्धारण जमीन की भार वहन क्षमता (Soil Bearing Capacity), इलाके की सड़क की चौड़ाई, सीवरेज नेटवर्क, पानी-बिजली की आपूर्ति और आपदा (भूकंप/आग) के समय सुरक्षित निकासी के वैज्ञानिक मूल्यांकन पर किया जाता है.

कागजों पर नियम व जमीन पर ‘जानलेवा’ उल्लंघन: सीमापुरी और सत्य निकेतन जैसी घटनाओं की तह में नियमों की घोर अनदेखी शामिल है.
ओवरलोडिंग व अवैध मंजिलें: रिहाइशी व संकरी गलियों वाले इलाकों में सुरक्षा मानकों के तहत इमारत की ऊंचाई सीमित होती है. इसके बावजूद पीजी, कैफे और व्यावसायिक दुकानें चलाने के लिए 3-4 मंजिल की क्षमता वाली नींव पर 5 से 6 मंजिलें तान दी जाती हैं. 100-150 वर्ग गज की पुरानी बुनियाद पर क्षमता से दोगुना वजन डालने से ढांचा अस्थिर होकर धराशायी हो जाता है.
बिना अनुमति मरम्मत कार्य: UBBL-2016 के तहत पुरानी इमारतों में कोई बड़ा बदलाव करने के लिए नगर निगम से अनुमति व मान्यता प्राप्त स्ट्रक्चरल इंजीनियर का ‘स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट’ लेना अनिवार्य है. हकीकत में मामूली मरम्मत का बहाना बनाकर लोड-बेयरिंग (वजन उठाने वाली) दीवारों और पिलरों से छेड़छाड़ की जाती है, जिससे पूरी इमारत की मियाद खत्म हो जाती है.
बिना फायर एनओसी के संचालन: दिल्ली फायर सर्विस ने विधानसभा समिति के समक्ष माना था कि हडसन लेन और जीटीबी नगर क्षेत्र में चल रहे अधिकांश रेस्तरां/कमर्शियल प्रतिष्ठानों को कोई ‘फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट’ जारी नहीं किया गया था. स्वीकृत बिल्डिंग प्लान न होने व क्षमता से अधिक सीटिंग/मंजिलें बढ़ाने के कारण उनके आवेदन खारिज कर दिए गए थे. इसके बावजूद निगम और पुलिस प्रशासन की शह पर ऐसे असुरक्षित ढांचे बेधड़क चलते रहे.
सीवर और ड्रेनेज पर अवैध कब्जा: रिपोर्ट के अनुसार रिहाइशी इलाकों में चल रहे इन कमर्शियल ढाँचों द्वारा सर्विस लेन, फुटपाथ व सार्वजनिक जमीनों पर जनरेटर सेट, एसी डक्ट और चिमनियां लगाकर अवैध कब्जे किए जाते हैं. रेस्तरां और पीजी का कचरा व ग्रीस सीधे घरेलू सीवर लाइनों में बहाया जाता है, जिससे ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह चोक हो जाता है.

सुरक्षा व संकरी गलियों का संकट: संकरी गलियों में नियमों को ताक पर रखकर बहुमंजिला निर्माण कर लिए जाते हैं. आग या हादसा होने पर फायर ब्रिगेड या एम्बुलेंस का पहुंचना असंभव हो जाता है. सत्य निकेतन हादसे के दौरान भी संकरी गली होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन व बुलडोजर/क्रेन पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ी.
अंतर-विभागीय तालमेल की कमी व प्रशासनिक लापरवाही
विधानसभा की रिपोर्ट में ये स्पष्ट तौर पर दर्ज किया गया था कि नगर निगम, दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली जल बोर्ड व राजस्व विभाग के बीच तालमेल का घोर अभाव है. एक एजेंसी दूसरी एजेंसी पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ लेती है. जब 5 मंजिला अवैध ढांचा खड़ा किया जा रहा होता है या पुरानी इमारत की नींव खोदी जा रही होती है, तब स्थानीय जूनियर इंजीनियर, बिल्डिंग इंस्पेक्टर व बीट कांस्टेबल की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठते हैं.
सीमापुरी इलाके में हुई ये हादसा दिल्ली के नगर निकायों व अवैध निर्माणकर्ताओं के सांठगांठ का भयावह परिणाम है. यदि MPD-2021 और UBBL-2016 के नियमों को केवल कागजों तक सीमित रखा गया. घनी आबादी वाले रिहाइशी इलाकों में चल रहे अवैध कमर्शियल निर्माणों का स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट नहीं कराया गया तो दिल्ली की संकरी गलियों में खड़े ये जर्जर बहुमंजिला ढांचे भविष्य में और भी बड़े हादसों का कारण बनते रहेंगे.





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