पंचायत संघ और पालम 360 खाप ने स्थायी समिति अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन

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September 9, 2026

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-दिल्ली के गांवों को टैक्स से राहत देने की मांग तेज

नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-    राजधानी दिल्ली के ग्रामीण इलाकों पर लगाए जा रहे हाउस टैक्स और अन्य शहरी नियमों के खिलाफ अब गांवों की आवाज़ तेज होती नजर आ रही है। दिल्ली पंचायत संघ और पालम 360 गांव खाप के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम की स्थायी समिति अध्यक्षा श्रीमती सत्या शर्मा से मुलाकात कर गांवों को सभी प्रकार के नगर निगम करों से मुक्त करने की मांग उठाई। प्रतिनिधियों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों पर शहरी नियम थोपे जाने से स्थानीय लोगों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति प्रभावित हो रही है, जिसे तुरंत सुधारा जाना आवश्यक है।

ग्रामीणों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा
प्रतिनिधिमंडल ने स्थायी समिति अध्यक्ष को सौंपे ज्ञापन में स्पष्ट किया कि दिल्ली के गांवों की जीवनशैली, रोजगार के साधन और सामाजिक ढांचा शहरी इलाकों से बिल्कुल अलग है। इसके बावजूद हाउस टैक्स, कन्वर्जन शुल्क, पार्किंग चार्ज और अन्य शुल्क लगाए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। श्रीमती सत्या शर्मा ने प्रतिनिधियों की बातों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए भरोसा दिलाया कि इन मुद्दों पर सकारात्मक पहल की जाएगी और ग्रामीण हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

प्रतिनिधियों ने रखीं प्रमुख मांगें
दिल्ली पंचायत संघ के प्रमुख थान सिंह यादव ने कहा कि मौजूदा समय में नगर निगम और विधानसभा दोनों जगह एक ही सरकार होने के कारण ग्रामीणों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान अब संभव है। उन्होंने मांग रखी कि सभी गांवों को हाउस टैक्स और अन्य शुल्कों से पूरी तरह छूट दी जाए। साथ ही गांवों को भवन उपनियमों से बाहर रखने की बात कही गई, ताकि मकान निर्माण या मरम्मत के नाम पर नोटिस और कार्रवाई से लोगों को राहत मिल सके। इसके अलावा गांवों को व्यावसायिक श्रेणी में शामिल कर रोजगार के अवसर बढ़ाने और सील की गई संपत्तियों को दोबारा खोलने की मांग भी उठाई गई।

ग्रामीण प्रतिनिधियों की मौजूदगी
इस अवसर पर पंचायत संघ और खाप के कई पदाधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में कहा कि यदि मांगें स्वीकार होती हैं तो गांवों में विकास, भरोसा और संतुलित प्रगति का नया माहौल बनेगा। उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों के अनुसार नीतियां बनाकर ही वास्तविक विकास संभव है।

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