गणतंत्र दिवस की चमक के बीच अर्धसैनिक बलों के साथ भेदभाव का सवाल

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September 8, 2026

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नई दिल्ली/उमा सक्सेना/-   जब देश 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे जोश और गर्व के साथ मनाने जा रहा होगा, तब कर्तव्य पथ पर देश की सुरक्षा में तैनात जवान अपने बैंड-बाजों और परेड के साथ राष्ट्र को सलामी देते नजर आएंगे। इस दौरान अर्धसैनिक बलों के जवानों की वीरता, अनुशासन और बलिदान भी सामने आएगा, जो हर देशवासी के मन में देशभक्ति की भावना को और प्रबल करेगा। लेकिन इसी गौरवशाली दृश्य के पीछे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के साथ हो रहे सौतेले व्यवहार को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।

पेंशन और कल्याण सुविधाओं को लेकर गंभीर चिंता
एलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह द्वारा जारी एक प्रेस बयान में अर्धसैनिक बलों को मिलने वाली सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पुरानी पेंशन बहाली का फैसला सुनाए जाने के बावजूद अर्धसैनिक बलों के जवान आज भी इस सुविधा से वंचित हैं, जिससे सेवानिवृत्ति के बाद उनका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।

शहीदों और रिटायर्ड जवानों के लिए अलग फंड की मांग
रणबीर सिंह ने यह भी कहा कि सेना झंडा दिवस कोष की तरह अर्धसैनिक बलों के लिए कोई अलग कल्याण कोष मौजूद नहीं है, जिससे गैर-पेंशनभोगी कर्मियों, सेवानिवृत्त जवानों और शहीदों के परिजनों को आर्थिक सहायता मिल सके। इसके अलावा हरियाणा और उत्तराखंड को छोड़कर अधिकांश राज्यों में कल्याण बोर्डों का अभाव है, जहां पेंशन या पुनर्वास से जुड़े मामलों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सके।

अर्धसैनिक बलों के लिए अलग दिवस नहीं, जताया गया अफसोस
पूर्व एडीजी सीआरपीएफ एच.आर. सिंह ने 15 जनवरी को देशभर में मनाए गए सेना दिवस पर खुशी जताई, लेकिन साथ ही यह अफसोस भी जाहिर किया कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए कोई संयुक्त दिवस निर्धारित नहीं है। उन्होंने कहा कि अर्धसैनिक झंडा दिवस कोष या सीएपीएफ दिवस के आयोजन के लिए बड़े बजट की नहीं, बल्कि सरकारी इच्छाशक्ति की जरूरत है।

गणतंत्र दिवस परेड में बीएसएफ को शामिल न करने पर आपत्ति
इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में बीएसएफ के दस्ते को शामिल न किए जाने पर भी नाराजगी जाहिर की गई। रणबीर सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन के 118 बंकर तबाह करने वाले बीएसएफ जवानों के शौर्य का प्रदर्शन परेड में होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यदि ऊंट, घोड़े और हाथियों पर सवार बीएसएफ जवान कर्तव्य पथ पर कदमताल करते, तो यह दृश्य पूरे देश को गर्व से भर देता।

देश की आंतरिक सुरक्षा में अहम भूमिका
लेख में यह भी उल्लेख किया गया कि सीआरपीएफ नक्सलवाद के खिलाफ लगातार मोर्चा संभाले हुए है, सीआईएसएफ देश की औद्योगिक और सामरिक इकाइयों की सुरक्षा में तैनात है, जबकि बीएसएफ एकमात्र ऐसी फोर्स है जिसके पास अपना तोपखाना, मरीन विंग और एयर विंग मौजूद है। इसके बावजूद इन बलों को अक्सर सिविलियन श्रेणी में रखे जाने को लेकर नाराजगी है।

गणतंत्र दिवस पर सरकार से बड़ी उम्मीद
अंत में यह उम्मीद जताई गई है कि देश की सुरक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले अर्धसैनिक बलों के सम्मान में माननीय गृह मंत्री गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुरानी पेंशन बहाली, अर्धसैनिक झंडा दिवस कोष, सीएपीएफ दिवस और अन्य कल्याणकारी सुविधाओं की घोषणा करेंगे, ताकि जवानों और उनके परिवारों को यह राष्ट्रीय पर्व एक सच्चे उपहार के रूप में याद रहे।

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