अगर मुझे इस्लाम पर विश्वास नहीं,तो मैं क्या करु? सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम महिला ने दी याचिका

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August 20, 2026

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अगर मुझे इस्लाम पर विश्वास नहीं,तो मैं क्या करु? सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम महिला ने दी याचिका

मानसी शर्मा/-   सुप्रीम कोर्ट में एक मुस्लिम महिला ने शरिया कानून के खिलाफ याचिका दायर करने मांग की है। महिला ने याचिका में खुद पर शरीयत के बजाय भारतीय उत्तराधिकार कानून लागू करने की मांग की है। यह महिला केरल के अलपुझा की रहने वाली है। उसका कहना है कि उसे शरीयत कानून में विश्वास नहीं है। महिला की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर सरकार का इस मुद्दे पर पक्ष पूछा है। धर्मनिरपेक्ष कानून की करी मांग अलपुझा की रहने वाली महिला का कहना है कि वह इस्लाम को नहीं मानती। हांलाकि,

अभी भी उसने आधिकारिक रूप से इस्लाम को नहीं छोड़ा है। वह चाहती है कि संविधान के अनुच्छेद 25के तहत उसे धर्म का अधिकार मिले। याचिकाकर्ता ने कहा, उसे धर्म पर विश्वास करना है या नहीं इसका अधिकार भी उसे मिलना चाहिए। महिला ने कोर्ट से मांग की है जो शख्स मुस्लिम पर्सनल लॉ को नहीं मानता, उस पर देश के धर्मनिरपेक्ष कानून लागू होने चाहिए। मुस्लिम महिला की इस याचिका की अपील वकील प्रशांत पद्मनाभन की ओर गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति इस्लाम में विश्वास नहीं रखता है तो उसे समुदाय से बेदखल कर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में इस्लाम को छोड़ने वाले शख्स को अपने पिता की संपत्ति में हिस्सा नहीं मिल पाएगा। कोर्ट से 3 हफ्ते का मांगा समय केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि ‘याचिका में रोचक सवाल उठाया गया है।

’ उन्होने कहा कि ‘याचिकाकर्ता महिला एक पैदाइशी मुस्लिम है। उनका कहना है कि वे शरीयत कानून में विश्वास नहीं रखती और यह एक पिछड़ा हुआ कानून है।’ वहीं दूसरी ओर, पीठ का कहना है कि ‘यह आस्था के खिलाफ है और केंद्र सरकार को इसके जवाब में हलफनामा दाखिल करना होगा।’ जवाब दाखिल करने के लिए तुषार मेहता ने 3 हफ्ते का समय मांगा है। इस पर पीठ ने 4 हफ्ते का समय दिया है। अब अगली सुनवाई की तारीख 5 मई तय की गई है।

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