विश्व कल्याण के लिए इस्कॉन द्वारका में गीता जयंती यज्ञ महोत्सव

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विश्व कल्याण के लिए इस्कॉन द्वारका में गीता जयंती यज्ञ महोत्सव

-हवन-यज्ञ में गीता के 700 श्लोकों द्वारा दी जाएगी आहुति -गीता जयंती यज्ञ समारोह में हजारों भक्तों की भागीदारी -इस्कॉन द्वारका की 50 से अधिक सोसाइटीज में भी संपन्न होगा हवन-यज्ञ

बांग्लादेश में इन दिनों जो हालात हैं, उसके प्रति हमारी संवेदनाएँ मानवता को पुकार रही हैं। हर दिन उगते सूरज की लालिमा के साथ यही आस जमती है कि विश्व शांति एवं कल्याण में हमारा प्रयास बेहतर हो। इसी उद्धेश्य से 11 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी के दिन गीता जयंती के अवसर पर इस्कॉन द्वारका द्वारा गीता जयंती महोत्सव मनाया जा रहा है। प्रातः 9 बजे से हजारों की संख्या में भक्तगण एकजुट होकर श्रीमद्भगवद्गीता के 700 श्लोकों की आहुति हवन-यज्ञ में संपन्न करेंगे। प्रातः 8 बजे गीता जयंती पर विशेष लेक्चर रहेगा, जिसमें गीता की मुख्य शिक्षाओं—कर्मयोग, ज्ञानयोग व भक्तियोग— और हमारे जीवन में इसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से चर्चा की जाएगी।  

इस संबंध में इस्कॉन द्वारका के उपाध्यक्ष श्री गौर दास का कहना है कि, “जब भी विश्व में कहीं भी बिगड़े हालातों या युद्ध की भयावह सूचनाएँ संचारित होती हैं तो ह्रदय के कंपन को थामना मुश्किल होता है और ऐसे समय में ही भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को उपदेश के रूप में दी गई यही ‘लाइफ मैनुअल’ हमें सही दिशा प्रदान करती है कि हमें कैसे अपने आप को सँभालना है और विश्व शांति के कल्याण की दिशा में  किस प्रकार अग्रसर होना है!” उन्होंने आगे कहा कि मोक्षदा एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य उपदेश अर्जुन को सुनाया था ताकि अर्जुन के माध्यम से युगों-युगों तक मानवमात्र का कल्याण हो सके। इसलिए हम सब भगवान द्वारा कहे गए इन श्लोक रूपी गीतों को सुनते हैं और आहुति देते हैं। गीता में स्वयं भगवान कृष्ण ने कहा है कि यह सारे विश्व के लिए मंगलकारी है। मनुष्य को चाहिए कि श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति श्रद्धा रखते हुए तथा ज्ञान के साथ कृष्णभावनामृत को अपनाए। अपने कल्याण के लिए वह कृष्ण विद्या को जाने। अतः हमने उन लोगों के लिए जो किसी कारणवश मंदिर में नहीं पहुँच पाएँगे उनके लिए इस्कॉन द्वारका की 50 से अधिक सोसाइटीज में भी हवन-यज्ञ का कार्यक्रम आयोजित किया है। अतः आप भी इस गीता जयंती यज्ञ में भाग लें और वैश्विक कल्याण की दिशा में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

गौरतलब है कि इस दिन तुला दान की भी बहुत महत्ता बताई जाती है। जो लोग भगवद्गीता प्रायोजित करना चाहते हैं, वे अपना या बच्चों का या परिवार के किसी भी सदस्य के भार के अनुरूप गीता का तुला दान कर सकते हैं। मंदिर प्रांगण में ही तुला दान की व्यवस्था की गई है।

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