हिजाब बैन पर फंसा पेंच, सुप्रीम कोर्ट के जज बंटे,

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हिजाब बैन पर फंसा पेंच, सुप्रीम कोर्ट के जज बंटे,

-संविधान पीठ के पास जा सकता है केस, अब सीजेआई ही तय करेंगे जज

नई दिल्ली/- कर्नाटक हिजाब विवाद मामले पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को अपना अंतिम फैसला नहीं सुना पाया है। सुप्रीम कोर्ट के दोनों ही जजों की राय इस मामले पर अलग-अलग होने पर मामले में पेंच फंस गया है। जिसके बाद मामले को बड़ी बेंच को सौंप दिया गया है। अब हिजाब मामले की सुनवाई तीन जजों की बेंच करेगी। हिजाब पर बैन सही है या गलत, इस पर फैसला अब सीजेआई यूयू ललित करेंगे। 10 दिनों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था।
             सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस गुप्ता ने बताया कि हमारे अलग विचारों के चलते मामला चीफ जस्टिस के पास भेज रहे हैं, ताकि वह बड़ी बेंच का गठन करें। बेंच में शामिल दोनों जजों की राय अलग-अलग है। जहां जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हिजाब बैन को सही ठहराया है। वहीं, जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कर्नाटक हाईकोर्ट के बैन जारी रखने के आदेश को रद्द कर दिया। ऐसे में अब इस मामले को 3 जजों की बड़ी बेंच में भेजा गया है।

किस जज ने क्या कहा?
जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को गलत बताया। उन्होने कहा कि मेरे लिए लड़कियों की पढ़ाई का सवाल सबसे अहम है। क्या हम उनका जीवन कुछ बेहतर कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि हिजाब पहनना या न पहनना, ये पसंद का मामला है। लड़कियों की शिक्षा बहुत जरूरी है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। जस्टिस धूलिया ने कहा कि धार्मिक प्रथाओं का मुद्दा विवाद के समाधान के लिए जरूरी नहीं था, वहां हाईकोर्ट ने गलत रास्ता अपनाया. ये अनुच्छेद 15 के बारे में था, ये पसंद की बात थी, इससे ज्यादा और कुछ नहीं। उन्होंने हिजाब पर लगे प्रतिबंध को हटाने का आदेश दिया।
               जस्टिस गुप्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले से सहमति जताई और कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर सभी 26 याचिकाओं को खारिज कर दिया। उन्होने इस फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल करनेवाले से 11 सवाल पूछे। उन्होंने सवाल किया कि क्या छात्रों को आर्टिकल 19, 21 और 25 के तहत कपड़े चुनने का अधिकार दिया जा सकता है? अनुच्छेद 25 की सीमा क्या है? व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार की व्याख्या किस तरह से की जाए? क्या कॉलेज छात्रों की यूनिफॉर्म पर फैसला कर सकते हैं? क्या हिजाब पहनना और इसे प्रतिबंधित करना धर्म की स्वतंत्रता का उल्लंघन है?

अब आगे क्या?
अब ये पूरा मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पास जाएगा। अब वही फैसला लेंगे कि अब इस मामले पर फैसला लेने के लिए नई बेंच बनाई जाए या फिर मामले को बड़ी बेंच के पास भेजा जाए। इससे पहले पीठ ने 10 दिनों तक मामले में दलीलें सुनने के बाद 22 सितंबर को याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 15 मार्च को राज्य के उडुपी में गवर्नमेंट प्री-यूनिवर्सिटी गर्ल्स कॉलेज की मुस्लिम छात्राओं के एक वर्ग द्वारा कक्षाओं के अंदर हिजाब पहनने की अनुमति देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम में आवश्यक धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है। बता दें, जस्टिस गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने 10 दिन तक इस मामले में दलीलें सुनने के बाद 22 सितंबर को याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने जोर देकर कहा था कि मुस्लिम लड़कियों को कक्षाओं में हिजाब पहनने से रोकने से उनकी पढ़ाई खतरे में पड़ जाएगी क्योंकि उन्हें कक्षाओं में जाने से रोका जा सकता है।

नतीजा क्या निकला?
जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कहा कि यह मामला सीजेआई को भेजा जा रहा है, ताकि वे उचित निर्देश दे सकें। याचिकाकर्ता के वकील एजाज मकबूल ने कहा कि अब सीजेआई यह तय करेंगे कि इस मामले पर सुनवाई के लिए बड़ी बेंच गठित की जाए या फिर कोई और बेंच।

हिजाब पर बैन बरकरार रहेगा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बी नागेश ने बताया कि कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला अभी अंतरिम तौर पर लागू रहेगा। इसलिए स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पर बैन बरकरार रहेगा।

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