क्वायल्ड यूरेटर्स और बढ़ी हुई किडनी से पीड़ित 12 साल के इराकी बच्चे की रोबोटिक सर्जरी से बचाई जान

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August 25, 2026

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क्वायल्ड यूरेटर्स और बढ़ी हुई किडनी से पीड़ित 12 साल के इराकी बच्चे की रोबोटिक सर्जरी से बचाई जान

-दिल्ली के बीएलके मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने किया कारनामा

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/भावना शर्मा/- 12 साल के एक ऐसे इराकी बच्चे की जान बचा ली गई जो जन्मजात बीमारी से पीड़ित था। इस वजह से उसकी दोनों किडनी और यूरेटर्स असामान्य रूप से बढ़ गई थी। बच्चे पर रोबोटिक सर्जरी की मदद से न्यूनतम शल्यक्रिया अपनाई गई। बच्चे की यूरेटर्स (मूत्रनली) 5 सेमी तक फूल गई थी और यह लगभग 75 सेमी लंबी हो गई थी। महामारी के दौरान लगे यात्रा प्रतिबंध के कारण बच्चे की स्थिति बुरी तरह बिगड़ चुकी थी और उसे तुरंत सर्जरी की जरूरत थी। बीएलके मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने रोबोटिक सर्जरी के एक ही सत्र में बच्चे की दाहिनी किडनी भी बचा ली और यूरेटर की मरम्मत कर इसकी लंबाई भी कम कर दी। साथ ही बेकार हो चुकी बाईं किडनी को निकाल दिया।
  अस्पताल में जब बच्चे को लाया गया था तो उसकी प्रत्येक यूरेटर 75 सेमी लंबी थी जबकि इसका सामान्य आकार 15 सेमी ही होता है। उसकी किडनी 20 सेमी से 25 सेमी तक की हो गई थी जो सामान्य आकार में 8 सेमी ही होनी चाहिए। बीएलके मैक्स सुपर स्पेशियल्टी हॉस्पिटल के यूरोलॉजी एंड रेनल ट्रांसप्लांट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. यजवेंदर प्रताप सिंह राणा ने बताया कि, मास्टर अली को पेट में दर्द की शिकायत के बाद हमारे पास लाया गया था। जांच के बाद पता चला कि उसकी मूत्रनली बहुत बड़ी होने के साथ ही बाईं किडनी भी नाकाम हो गई थी और दाईं किडनी में भी दिक्कतें थीं। मेगा यूरेटर एक चिकित्सकीय अनियमित स्थिति होती है, जिसमें मूत्रनली असामान्य रूप से बड़ी हो जाती है। उसकी बाईं नेफ्रो यूरेटरेक्टोमी की रोबोटिक सर्जरी कराई गई। उसकी मूत्रनली इतनी बड़ी हो गई थी कि आधा पेट इसी से भरा हुआ था। इस वजह से ब्लाडर से किडनी तक पेशाब उल्टी दिशा में जा रही थी जिससे वह बढ़ती जा रही थी।
  डॉ. राणा ने बताया कि बच्चे की किडनी और मूत्रनली बड़ा होने की वजह जन्म से ही मूत्रनली में ब्लॉकेज होना थी जिसके बारे में वर्षों तक पता नहीं चल पाया था और इससे किडनी भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। बच्चे को यदि कुछ समय और विशेष चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलती तो उसकी दूसरी किडनी भी बेकार हो सकती थी और फिर बच्चे को किडनी ट्रांसप्लांट कराना पड़ सकता था। इस स्थिति को ठीक करने के लिए आम तौर पर डॉक्टर ओपन सर्जरी करते हैं लेकिन हमने उसकी रोबोटिक सर्जरी की जिसमें न्यूनतम शल्यक्रिया करनी पड़ती है और कम दर्द, कम रक्तस्राव तथा कट भी कम लगाना पड़ता है। इससे सर्जरी वाले स्थान पर संक्रमण की संभावना भी कम रहती है और मरीज को जल्दी डिस्चार्ज मिल जाता है। बच्चे की छोटी उम्र और छोटे पेट के कारण यह केस बहुत चुनौतीपूर्ण था। बाधित बड़ी मूत्रनलियों को ठीक करने के लिए दोनों तरफ का ऑपरेशन करने के लिए बच्चों के मामले में रोबोटिक सर्जरी ही सुरक्षित रहती है।

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