भारत में ओमिक्रॉन की डबल सेंचुरी, दिल्ली और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा संक्रमण

स्वामी,मुद्रक एवं प्रमुख संपादक

शिव कुमार यादव

वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी

संपादक

भावना शर्मा

पत्रकार एवं समाजसेवी

प्रबन्धक

Birendra Kumar

बिरेन्द्र कुमार

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आईटी प्रबंधक

Categories

October 2026
MTWTFSS
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031 
October 23, 2026

हर ख़बर पर हमारी पकड़

भारत में ओमिक्रॉन की डबल सेंचुरी, दिल्ली और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा संक्रमण

20 दिन में 13 राज्यों में नये वेरियंट की दस्तक

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- देश में ओमिक्रॉन संक्रमण के मामले 200 के पार हो गए हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में दिल्ली और महाराष्ट्र शामिल हैं। दोनों राज्यों में ओमिक्रॉन के 54-54 मामले मिले हैं। इसमें खतरे की बात यह है कि देश में पहले 100 मामले 15 दिन में मिले थे, लेकिन 100 से 200 मामले होने में सिर्फ 5 दिन का समय लगा।

देश में ओमिक्रॉन के सबसे पहले दो मामले 2 दिसंबर को कर्नाटक में मिले थे। 14 दिसंबर को मामले बढ़कर 50 हुए। 17 दिसंबर को मामलों की संख्या 100 हुई। अगले 100 केस होने में सिर्फ 5 दिन लगे। देश के 13 राज्यों में ओमिक्रॉन के मामले सामने आए हैं। ओमिक्रॉन के बारे में दुनियाभर के वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी संक्रमण दर बहुत ज्यादा है। देश में ओमिक्रॉन के आंकड़ों को देखकर कहा जा सकता है कि इसके संक्रमण की रफ्तार बढ़ गई है। अमेरिका के टेक्सास में ओमिक्रॉन वैरिएंट से पहली मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इस व्यक्ति ने वैक्सीन की एक भी डोज नहीं लगवाई थी। मृतक की उम्र 50-60 साल के बीच बताई जा रही है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक 11 दिसंबर को समाप्त हुए हफ्ते में नए कोरोना केस में 73.2 फीसदी मामले ओमिक्रॉन के हैं। इससे पहले ब्रिटेन में ओमिक्रॉन के चलते एक शख्स की मौत हो चुकी है।

भारत में नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा था कि अगर हम ब्रिटेन में ओमिक्रॉन के संक्रमण का पैमाना देखें और भारत की आबादी से उसकी तुलना करें तो कहा जा सकता है कि संक्रमण फैलने पर भारत में रोजाना 14 लाख केस आएंगे। डॉ. पॉल ने कहा था कि दुनिया में दूसरे नंबर पर भारत में जीनोम सीक्वेंसिंग की जा रही है और इसे लगातार बढ़ाया ही जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर केस की जीनोम सीक्वेंसिंग करना संभव नहीं होगा। यह बीमारी को पहचानने का नहीं, बल्कि महामारी का आकलन और इसकी निगरानी करने का टूल है। हम इस बात का भरोसा दिला सकते हैं कि फिलहाल पर्याप्त सिस्टमैटिक सैंपलिंग की जा रही है।

About Post Author

आपने शायद इसे नहीं पढ़ा

Subscribe to get news in your inbox