एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन भारतीय रुपये का रहा, गिरावट जारी

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एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन भारतीय रुपये का रहा, गिरावट जारी

-इस तिमाही में ये 2 फीसदी तक टूट गया, अब आप पर होगा सीधा असर,

नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नई दिल्ली/शिव कुमार यादव/- भारतीय रुपये में लगातार गिरावट का दौर जारी है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट कहती है कि भारतीय रुपया एशियाई बाजार में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है। इसके पीछे मुख्य वजह विदेशी निवेशकों की ओर से जारी बिकवाली है। इसका सीधा मतलब है कि देश के शेयर बाज़ार से विदेशी निवेश अपना पैसा निकाल रहे है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका डॉलर के मुकाबले अक्टूबर दिसंबर तिमाही भारतीय रुपया 1.9 फीसदी कमजोर हो चुका है। ये 74 रुपये प्रति डॉलर के मुकाबले अब 76 रुपये प्रति डॉलर के पार पहुंच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक फंड ने भारतीय शेयर बाजार से 420 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 31,920 करोड़ रुपये) निकाल लिए है। एशिया में ये किसी भी शेयर बाज़ार से निकाली गई सबसे ज्यादा पूंजी है।कोरोना वायरस के नए संक्रमण ओमिक्रॉन के कारण भारतीय शेयर बाज़ार पर लगातार दबाव दिख रहा है। ऐसे में निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई है। इसके अलावा भारत के व्यापार में रिकॉर्ड घाटे संकेत मिल रहे है। अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व के साथ-साथ दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी पॉलिसी में बदलाव कर रहे है। महंगाई को काबू में करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने की तैयारी में है।

भारत अपनी जरुरत का 80 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। अमेरिकी डॉलर के महंगा होने से रुपया ज्यादा खर्च होगा. क्योंकि, विदेशों से सामान खरीदने के लिए रुपये को पहले डॉलर में बदला जाता है। इससे पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद महंगे होंगे। लिहाजा मालढुलाई महंगी हो जाएगी, यातायात महंगा हो जाएगा, इसका हर छोटी-बड़ी वस्तु पर असर पड़ेगा। विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों पर रुपये की कमजोरी का खासा असर पड़ेगा, इसके चलते उनका खर्च बढ़ जाएगा। उन्हें चीजों के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके अलावा विदेश यात्रा पर जाने वाले भारतीयों को भी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।

उधर, रुपये में कमजोरी भारतीय आईटी कंपनियों के लिए अच्छी खबर है। इससे उनकी कमाई में इजाफा होगा। इसी तरह एक्सपोटर्स को फायदा होगा, जबकि आयातकों को नुकसान होगा। रुपए में कमजोरी से कंपनियों के मार्जिन्स पर पॉजिटिव असर देखने को मिलेगा। आईटी सेक्टर के एक्सपर्ट्स बताते हैं कि रुपए में 100 पैसे के बदलाव पर कंपनियों के मार्जिन्स पर एक से डेढ़ फीसदी का पॉजिटिव असर होता है। साथ ही अमेरिका और यूरोप में आर्थिक हालात में सुधार से कंपनियों के लिए बेहतर माहौल बन रहा है। फार्मा की बड़ी कंपनियों का कारोबार अमेरिका और यूरोप से आता है। रुपए की कमजोरी से कंपनियों को फायदा मिलता है, ऐसे में अगले क्वाटर्स में कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन्स बढ़ सकते हैं।

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