नजफगढ़ मैट्रो न्यूज/नजफगढ़/शिव कुमार यादव/भावना शर्मा/- पिछले कई साल से राजनीतिक दांवपेंचों में उलझा नजफगढ़ का 100 बेड का अस्पताल अब जल्द शुरू होने जा रहा है। हालांकि इसका 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है लेकिन फिर भी इसके शुरू होने में सबसे बड़ी बाधा 57 पेड़ बने हुए थे जिन्हे वन विभाग काटने या हटाने की मंजूरी नही दे रहा था। लेंकिन अब हाईकोर्ट की फटकार के बाद न केवल वन विभाग ने इन पेड़ों के हटाने की मंजूरी दे दी है बल्कि इनके ट्रांसप्लांट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। जिसकी वजह से यह दावा किया जा रहा है कि अब नजफगढ़ वासियों को इस महामारी के काल में जल्द एक नया अस्पताल ईलाज के लिए मिल जायेगा।

नजफगढ़ के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में निर्माणाधीन इस अस्पताल परिसर से पेड़ों को हटाए जाने की मंजूरी नहीं मिलने की वजह से तीन बार इसके नक्शे में परिवर्तन करना पड़ा था लेकिन अब नजफगढ़ के 100 बेड के अस्पताल को शुरू करने में आ रही बाधा को अब दूर कर लिया गया है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब इस परिसर से 57 पेड़ों को जल्द ही ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। पेड़ों के ट्रांसप्लांट होने के बाद अस्पताल शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी जाएगी।
सांसद प्रवेश वर्मा ने इस अस्पताल की आधारशीला रखी थी हालांकि इससे पहले भी कई बार इस अस्पाताल की अधारशीला रखी गई लेकिन फिर भी कोई इसका निर्माण नही करा सका। अब इस अस्पताल का 90 फीसद निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। ओपीडी के लिए दो फ्लोर बनकर तैयार हो चुके है। इसके पहले की अस्पताल का संचालन शुरू हो, फुटपाथ पर टाइल्स लगाने का काम जोरो पर चल रहा है। इनके बीच फुल पत्तियां लगाने का कार्य भी जोरों पर है, लेकिन जब तक अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिल जाता तब तक अस्पताल को चालू नहीं किया जा सकता है। हालांकि अभी अस्पताल के चारों ओर सड़क बनाने का कार्य भी अभी होना बाकी है और इसी रोड़ के निर्माण में ही ये पेड़ आड़े आ रहे थे लेकिन अब हाईकोर्ट कें आदेश के बाद ये बाधा भी दूर हो गई है। इस संबंध में नजफगढ़ निगम जोन चेयरमैन सत्यपाल मलिक ने बताया कि वह शुरू से ही इस अस्पताल के निर्माण कार्य पर लगातार नजर रखे हुए है। हालांकि कोरोना महामारी में नजफगढ़ को अदद अस्पताल की काफी सख्त जरूरत महसूस हुई लेकिन उस समय भी वन विभाग अपनी मनमानी पर अड़ा रहा। हालांकि कुछ लोग अस्पताल पर चल रही राजनीति को भी इसके रूके रहने का कारण मान रहे है। श्री मलिक ने कहा कि हाई कोर्ट के फटकार के बाद अब वन विभाग ने पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने मंजूरी दे दी है। अगले दो महीने में इन 57 पेड़ों को ट्रांसप्लांट करने का काम पूरा हो जायेगा। इसी दौरान अस्पताल में पानी व बिजली का कनेक्शन भी लग जाने की पूरी संभावना है। इसके बाद पेरिफेरियल रोड का निर्माण कराया जाना संभव होगा। अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के बाद अस्पताल शुरू हो सकेगा।
एम्स करेगा अस्पताल का संचालन
सत्यपाल मलिक ने कहा कि दिल्ली का यह पहला अस्पताल है, जिसका संचालन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान करेगा। यहां पर डाक्टर और नर्स एम्स से आएंगे। यहां पर जो भी उपकरण लगेंगे वह एम्स की ओर से लगाया जाएगा। इन्होंने संभावना जताई कि जून तक अस्पताल बनकर तैयार हो जाएगा।


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